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एनडीए से निकल महागठबंधन की नाव में सवार हुए उपेंद्र कुशवाहा, क्या अब सांसद डॉ अरुण कुमार भी बनेंगे इस महागठबंधन का हिस्सा?

2019 में होने वाले लोकसभा चुनावों की तारीख जैसे-जैसे नज़दीक आती जा रही है। एनडीए के घटक दल टिकट बंटवारे को लेकर एनडीए से निकलते जा रहे हैं या जो हैं वे खुलेआम अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं।

अभी हाल के दिनों में एनडीए का हिस्सा रहे उपेंद्र कुशवाहा आख़िरकार महागठबंधन में शामिल हो ही गए। महागठबंधन में शामिल होने का आज उन्होंने इसका औपचारिक ऐलान भी कर दिया।
अब बिहार की राजनीति में सरगर्मियां बढ़ गई हैं। उधर उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी से सांसद डॉ अरुण कुमार ने भी अभी हाल ही में अपनी अलग पार्टी बनाई है और उन्होंने भी नाराज नेताओं की अच्छी खासी लिस्ट तैयार कर ली। यानि कुल मिलाकर बिहार में भाजपा की राह आसान नहीं होने वाली है।

जहानाबाद सांसद डॉ अरुण कुमार ने कुछ महीने पहले पटना के गांधी मैदान में एक विशाल रैली का आयोजन किया था इस रैली में पूरे बिहार से लाखों लोग आए थे। अरुण कुमार के इस शक्तिपरीक्षण का मतलब बिहार की राजनीति में अपनी अच्छी खासी उपस्थित दर्ज करवाना था।
बता दें कि अभी हाल ही के दिनों में उपेंद्र कुशवाहा से उनकी नजदीकियों की खबरें भी मिल रही हैं। कई मौकों पर वो उपेंद्र कुशवाहा के साथ नज़र आये हैं। डॉ० अरुण कुमार का बिहार में अच्छा वर्चस्व है वो समाजसेवा के लिए भी जाने जाते हैं।


ऐसे में सम्भावनायें जताई जा रही हैं कि डॉ अरुण कुमार भी महागठबंधन का हिस्सा हो सकते हैं।
जब हमने इस बाबत उनसे बात करने की कोशिश की तो उन्होंने इस पर कुछ भी बोलने से इंकार कर दिया।

अब उपेंद्र कुशवाहा जब महागठबंधन में शामिल हो गए हैं तो विपक्षी महागठबंधन की संभावनाएं लगातार होती जा रही हैं।
कुशवाहा ने जब महागठबंधन का हाथ थामा उस वक़्त राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता तेजस्वी यादव, शरद यादव व बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी आज ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के दिल्ली स्थित कार्यालय पहुंचे। वरिष्ठ कांग्रेस नेता अहमद पटेल भी यहां मौजूद रहे।

बिहार राजनीति में अहम दखल रखने वाले इन नेताओं की कांग्रेस से यह मुलाकात 2019 में होने वाले लोकसभा चुनावों को लेकर भाजपा के विरुद्ध बन रहे महागठबंधन के निर्माण में अहम भूमिका निभा सकती है। हाल ही में तीन राज्यों में शानदार प्रदर्शन करने वाली कांग्रेस के लिए भी लोकसभा चुनावों में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए अच्छा मौका हो सकता है। पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों के परिणामों से कांग्रेस यूं भी उत्साह में है।

बता दें कि इससे पहले बिहार में महागठबंधन के लिए सीट बंटवारे का फॉर्मूला तैयार कर लिया गया है। राजद नेता तेजस्वी यादव ने इस बारे में कहा था कि चीजें शाम तक साफ हो जाएंगी। उन्होंने कहा था कि महागठबंधन के लिए उपेंद्र कुशवाहा को भी आमंत्रित किया गया है। क्षेत्रीय दलों को कुचलने का प्रयास किया गया है। यहां तक कि लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) भी मोदी जी की गुटबंदी से खुश नहीं है।

महागठबंधन को लेकर हो रही बैठक में राजद नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार को ठगने के अलावा कुछ नहीं किया। महागठबंधन की लड़ाई देश व संविधान बचाने के लिए है। उपेंद्र कुशवाहा के महागठबंधन में शामिल होने को लेकर उन्होंने कहा कि यह खुशी की बात है। उन्होंने कहा कि बिहार में शिक्षा व्यवस्था के लिए कुशवाहा ने बहुत लड़ाइयां लड़ी हैं। तेजस्वी ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि महागठबंधन ठगों को करारा जवाब देगा।

महागठबंधन में शामिल होने के बाद उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि एनडीए छोड़ने का कारण यह था कि वहां मेरा अपमान हो रहा था। उन्होंने राहुल गांधी व लालू यादव का आभार जताया और कहा कि इन दोनों नेताओं ने उदारता दिखाई। उन्होंने एनडीए पर निशाना साधते हुए कहा कि पीएम मोदी व नीतीश कुमार ने कहा था कि अब बिहार के लोगों के लिए दवाई व कमाई के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा, लेकिन क्या ऐसा हुआ? कुशवाहा ने कहा वर्तमान सरकार हर मोर्चे पर फेल है। न तो यहां शिक्षा का स्तर सुधरा न रोजगार के रास्ते खुले।

कुशवाहा ने मोदी व नीतीश सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि नीतीश कुमार व मोदी सरकार ने बिहार को सिर्फ वादे दिए, उन्हें पूरा नहीं किया। उन्होंने कहा कि हमें और हमारी पार्टी को कमजोर करने की कई कोशिशें की गईं ताकि हम सोशल जस्टिस की बात न कर सकें। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को लेकर कहा कि गांधी की कथनी व करनी में कोई अंतर नहीं है।

कुशवाहा ने नीतीश कुमार पर आरोप लगाते हुए कहा, ‘नीतीश जी ने मुझे नीच कह कर अपमानित किया।’ किसानों की कर्जमाफी का उदाहरण देते हुए उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष की तारीफ की। इसके साथ ही एलान किया कि दो फरवरी को सरकार के खिलाफ पटना में आक्रोश मार्च निकालेंगे।

अब देखना यह दिलचस्प रहेगा कि इतने बड़े नेताओं के एनडीए से अलग हो जाने के बाद 2019 में भाजपा की राह कितनी आसान होगी कितनी मुश्किल? राजनीति है यहां कभी भी कुछ भी हो सकता है। यहां न कोई किसी का साथी है और न ही दुश्मन।

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