इस सम्बन्ध में मतदान केंद्रों को ऐसी व्यवस्था से जोड़ा जाये,जिसके माध्यम से पता चल सके कि-कितने प्रतिशत लोगों ने मतदान किया,यहाँ प्रतिशत मतदान का अर्थ-प्रचलित मतगणना से नहीं, बल्कि उस प्रतिशत से है, जिसमें जिस जिस ने वोटिंग की है,उसका आधार कार्ड या ऊँगली प्रिंटिंग के माध्यम से सरकारी रिकॉर्ड रहने से उसकी उपस्तिथि पता चलेगी और वही सरकारी या गैरसरकारी योजनाओं का लाभ उठा पायेगा,इस संदर्भ में वोटिंग मशीन में ही एक अतिरिक्त व्यवस्था की जानी चाहिए की-एक अतिरक्त स्थान पर वोटर को वोट कहीं भी डाले वो स्वतंत्र है,तब अपना वोट डालने के उपरांत वो वोटिंग मशीन में लगा एक “थम प्रिंट” यानि अपने अंगूठे की छाप लेने वाले बटन पर लगाये,जो की लगाना अनिवार्य है।तब वोटिंग मशीन के इस अंगूठे प्रिंटिग स्विच का सम्बन्ध सीधा सेटेलाइट के माध्यम सीधा मतदाता कार्यालय अथवा रोजगार कार्यालय से सम्बंधित कम्प्यूटर में अंकित हो जाने से एक सफल रिकॉर्ड रजिस्टर हो जायेगा!! आगे इसी सबंधित सुचना का उपयोग रोजगार कार्यालय जब भी देश के किसी भी प्रान्त में सर्विस आदि निकलेगा तभी उस रोजगार पेपर में ये लिखा अनिवार्य होगा की-जिसने चुनावों में अपना मतदान दिया है,वहीँ आवेदन भरने का अधिकारी है और जिसने मताधिकार का उपयोग नहीं किया है,वो इस प्रकार की किसी भी सरकारी या अर्द्ध सरकारी या प्राइवेट सर्विसों में भी सम्मलित नहीं हो सकेगा!!
इस प्रकार की और भी संशोधित प्रक्रिया के द्धारा की गयी व्यवस्था से मतदाताओं में 100% मतदान की जागरूकता बढ़ेगी और सही प्रतिशत में सम्पूर्ण मतदान भी होगा।
और उचित सरकार भी चुनने में साहयता मिलेगी और सरकारी साहयताओं का लाभ भी मतदाताओं को प्राप्त होगा।
इस विषय पर आगामी चुनावों से पूर्व सरकार को अधिक ध्यान देना होगा।और इस विचार योजना में जो संशोधन हो उसे करते हुए,अवश्य लागु किया जाना चाहिए।।
विशेष:- केवल संतों या ऐसे सन्यासियों को छोड़कर जो किसी भी प्रांत या देश से परे केवल अपनी आत्मसाक्षात्कार को ही इस संसार में त्यागी बन रहते है।यो उनका मत तो ईश्वर या स्वयं को होता है।उपयुक्त नियम सामान्य संसारिक जनों के लिए है।
और भिक्षा मांगने वाले सन्तों और भिखरियों के लिए भी ऐसी ही एक व्यवस्था से जोड़ा जाना चाहिए की-आप राशन विभाग में अपना रजिस्टेशन कराये और आधार कार्ड और अंगूठे की छाप लगा कर अपने क्षेत्र की राशन दुकान से प्रतिदिन या साप्ताहिक भोजन सामग्री प्राप्त करें।यो जन समाज में भी इन कथित माँगता बाबाओं के इस दैनिक अनावश्यक मांगने और लालच के चलते लोगो के दिए धर्म लाभ हेतु-कम्बल,कपड़े, और दवाइयों के नाम पर पैसा मांग फिर उसे कहीं बिक्री करके अपने व्यसनों पर खर्च करने की अव्यवस्था पर बड़ा अंकुश लग जायेगा।इस विषय पर भी ऐसी चिंतन योजनाओं को सरकार को लागु करना चाहिए तब कानून अधिकार होने से जन साधारण धार्मिक श्रद्धालुओं में भी जागर्ति आएगी और वे इन कथित बाबाओं से निडर अपना कथन रखते हुए की-भई तुम राशन कार्यालय से जाकर अपना राशन लो और यदि तुम लोगों को सरकारी राशन देने वाला नहीं देता है तब हम उससे जाकर इस सम्बन्ध में कहेंगे,यो अपना रजिस्टेशन दिखाओ और नहीं है चलो कराते है।तब ये अनावश्यक भिखरियों का व्यभचारी प्रपंच बहुत हद तक अंकुश में आ जायेगा।
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श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येंद्र जी महाराज
जय सत्य ॐ सिद्धायै नमः
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