तुम्ही हो सच्चे खुदा के बंदे
जिसने खुदा को खुदा बनाया।
जहां में अपना ख़ौफ़ फेलाकर
मतलब बदल इबादत बनाया।।
तुम ना होते रसूख़ न होता
और ना होता रसूल।
और सदक़ा भी सिखाया तुमने।
तभी बने इश्क़े उसूल।।
मंदिर मस्ज़िद गुरुद्धारे
और भरे तुम्हीं ने चर्च।
तुम्हीं पूजते आज ईश्वर बनकर
तुम बसे ग्रन्थ हर पर्च।।
काम क्रोध लोभ मद
ईर्ष्या और द्धेष।
अंह संग अशांति बन
तुम्ही अष्ट रूप भेष।।
ब्रह्मचर्य ग्रहस्थ मोक्ष तक
सभी धर्म मंथन नाम युद्ध।
तुम्हारे कारण ही अष्ट विकार
बने अष्ट सुकार हो शुद्ध।
तुम्ही खुदाई परीक्षा पहली
जिसे पार करे वही सिद्ध।
महावीर बुद्ध मोहम्मद ईसा
बने मिटे पार तुम ज़िद्द।।
तुम्ही पाप और मौत फ़रिश्ते
तुम्हरी संगत बनते रिश्ते।
पहला ज्ञान अभिमान तुम्ही हो
तुम्ही उद्धारक पाक़ हर रश्ते।।
डर ने अदब आदाब बनाया
डर डॉट से डटना सिखाया।
भय से प्रण प्रणाम बने सब
तुम्हे करूँ मैं यूँ प्यार अदाया।।
तुम्ही महा अमावस चन्द्र
और तुम्ही सभी ग्रहण के दाता।
तभी सृष्टि अति सुन्दर बनती
और ईश प्रकाश समझ में आता।।
सभी धर्म की भविष्यवाणियां
शैतान कर्म से पूर्ण।
ईश्वर जन्म के कारण आप
सभी धर्म आपसे पूर्ण।।
पृथ्वी पर साम्राज्य आप
और आप ही बनते शाप।
धन्य आप शाप रूप में
गंगा आई तारण ताप।।
महिषासुर से देवी नो
और रावण से है राम।
चौबीस अवतार युग बारह
कंस से धरा है कृष्ण धाम।।
शैतान से है बाइबिल
और शैतान से कुरान।
सृष्टि प्रारम्भ अंधकार से
वेद सिद्ध भगवान पुराण।।
महिमा बिन शैतान के
अधूरे सभी कर्म।
जो जाने शैतान को
वही पाये सत्य धर्म।।
बारह अमावस तेरा राज
दुदुंभी तेरा आगाज साज।
काला कौवा काला बाज
हरी रौशनी तुझपे साज।।
ख़ूनी भेंट चढ़ाना काज
तीन जहां के जाने राज।
इश्क़ मोहब्बत प्यार से नफरत
रात पुजारी करता नाज़।।
घोर अँधेरे ध्याता जो भी
इत्र सुलगाता बिन एतराज।
रूह को अपनी तुझको देकर
सब कुछ पाता तेरी आवाज।।
जय शैतान सदा हितकारी
रंक को राजा बनाते भिखारी।
उलट फेर परिवर्तन तुम हो
मैं “सत्य” सदा तुम्हरा आभारी।।
जय सत्य ॐ सिद्धायै नमः
देवी पूर्णिमा और अमावस देवी द्धारा ईश्वर और शैतान की सत्यकथा:-
शैतान और ईश्वर के अस्तित्व में बड़ी भारी समानता है इस सम्बन्ध में एक बार पूर्णिमा से अमावस ने पूछा की ये भय और अभय अर्थात ईश्वर और शैतान या देव और दैत्य का संघर्ष और शत्रुता क्या है? और किसने इसका अनुभव व् विस्तार किया? तब पूर्णिमा देवी बोली जिस प्रकार से मैं और तुम एक ही चन्द्रमा के दो पहलु यानि भाग है और इस चन्द्रमा को सूर्य के प्रकाश से प्रकाशित और अँधेरा मिला है। और हम दोनों के बीच एक चन्द्रमा का समान अर्थ है ठीक वेसे ही सूर्य आत्मा का प्रतीक है। और चन्द्रमा मन का और इन दोनों को धारण और ग्रहण करने वाला मनुष्य है जैसे-मानो मनुष्य प्रकाश की और बढ़े। तो उसे सभी कुछ स्पष्ट दिखाई देता है और यही मनुष्य जब पलट कर अपने विपरीत चले तो उसे अपनी परछाई दिखाई देगी और उसे प्रकाश से दूर होते हुए अंधकार में कुछ भी स्पष्ट नही दिखाई देगा और वो समझेगा की ये क्या हो रहा है एक तरफ उजाला है। जो मेरा प्रत्येक मार्ग स्पष्ट करता है उसमे मुझे सब ठीक लगता है और दूसरी और ये अँधेरा मुझे सभी कार्यों से रोकता है। यो वो उजाले को पसन्द करेगा और अँधेरे से डरेगा और उसका यही अज्ञान उसे अपनी ही छाया की भांति दो अलग अलग व्यक्तित्त्व के भ्रम में डालता है। और यही से अभय और भय या देव और दैत्य या ईश्वर और शैतान का जन्म और उनके बीच मनुष्य के अज्ञान के संघर्ष की कहानी चली आ रही है। जिसको अनेक धर्मों में अनेक प्रकार से कहा गया है। और इस अज्ञान का मनुष्य ने मनुष्य के ख़िलाफ़ अपना लाभ पाने के लिए उपयोग किया है। जो आज तक तथाकथित धर्म कहा जाता है जो इसे जान लेता है की तू ही दोनों तरफ है। वो सदा ज्ञान के प्रकाश से घिरा रहता है और मुक्त है बाकि भयभीत रहते है। जिसे कथाओं में इस प्रकार से बताया गया है। की एक बार एक सन्त अपने धर्म प्रचार से लौटते हुए अपने मठ की और वापस आ रहे थे उन्हें रास्ते में एक मरणासन्न अवस्था में व्यक्ति पड़ा दिखाई दिया। उसे देख सन्त ने उससे पूछा की मेने तुम्हे कहीं देखा है। तब वो मरणासन्न व्यक्ति ने कहा की तुमने मुझे अवश्य देखा होगा। मैं शैतान हूँ और मेरा तुम्हारा अनन्तकाल से रिश्ता है। तब सन्त को स्मरण हुआ की हां इसे मेने धार्मिक पुस्तकों में चित्रित देखा है इसकी सभी धर्मग्रन्थों में चर्चा है की इससे बचकर रहो ये शैतान,दैत्य आदि नामों से जाना जाता है। तब सन्त ने सोचा इसे तो इसी हालत में छोड़ देता हूँ ये तो मर जायेगा अच्छा रहेगा। तब शैतान हंसा और बोला की मेरा अंत हो गया तो तुम सब भी भूखे मरोगे और मेरा नाम इस संसार से मिट गया। तो तुम्हारी जीविका रोजी रोटी का क्या होगा? तब वो किस भय से चलाओगे? मेरे आस्तित्व से ही तुम्हारा अस्तित्व है। ये सुन सन्त आश्चर्य में पड़ गए और तब उन्होंने उससे पूछा तुम्हारा ये हाल कैसे और किसने किया तब शैतान बोला- आजकल जिस धर्म को तुम मानते हो उसकी भी उपेक्षा हो रही है। व्यक्ति नास्तिकवाद को अपना रहा है। उसे समझ में ना तुम्हारा धर्म ज्ञान आ रहा है और वो इस नासमझ से ना ही भय को मान रहा है। तब वो ना धार्मिक है ना अधार्मिक है। यो जितना न भय रहेगा न अभय रहेगा और रहेगी केवल उपेक्षा तो इसी विरोध से तुम्हारा धर्म भी कमजोर बनता जा रहा है और जब तुम्हारा धर्म कमजोर बनेगा तो तुम्हारे साथ साथ मेरा भी धर्म कमजोर बनता जायेगा यो मैं कमजोरी का शिकार हूँ और यो मेरी ये हालत है। आओ इसे मैं तुम्हे प्रारम्भ से समझता हूँ की मेरा तुम्हारा नाता कितना अटूट है। मेरे बिना तुम नही और तुम्हारे बिना मैं नही हूँ और नाही रहेंगे।मेरे ही आस्तित्व के भय से ईश्वर का आस्तित्व है तभी उस मेरे शत्रु के मन्दिर बने है। लोग मेरे ही भय से अपनी महनत की बचत। सोना,चांदी,पैसा,सेवा,तप,जप,दान करते है। जो तुम्हारी उपदेशकों और पुजारियों के खजाने भरता है तुम इस अहंकार से भरे रहते हो, जो तुम्हारी नासमझी कहलाती है। जब मनुष्य ने सबसे पहले प्रकाश को देखा और उसने उसमे सब स्पष्ट देखा तो वो बोला की इस प्रकाश के पीछे जो भी है। वो बड़ा दयालु और मेरी साहयता करने वाला है वह मेरा हितेषी है यो उसका नाम उसने अनेक नाम समय समय पर रखे। जो ईश्वर,भगवान,अल्लाह,गॉड कहलाये और जब वो उस प्रकाश से पीछे को पलटा, तो उसने अपनी ही परछाई को जमीन पर देख कहा की अरे ये मेरे आलावा बिना आँख नाक कान आदि के जैसा कौन है? जो मेरी ही नकल करता अधिकतर मेरे साथ बना रहता है। मेरा पीछा नही छोड़ता है। जब मैं सो जाता हूँ तब ये मेरे सपनों में ऐसे ही आक्रति धारण कर मुझे डरता है ये कौन है? ये कहाँ से आया है? ये उस प्रकाश की और नही दिखाई देता वहाँ ये मिट और चला जाता है। यो ये प्रकाश से डरता है ये इस प्रकाश जो मेरा हितेषी है उसका और मेरा शत्रु है। यही वो मेरा अहित करने वाला मुझे डराने वाला अद्रश्य शक्ति व्यक्तित्व है। और उसको भी मनुष्य ने अनेक नामों से समय समय पर पुकारा जो शैतान,दैत्य,पिशाच,भुत,ल्युसिफर आदि कहा और इसी दो बलशाली शक्तियों के बीच अपने को फंसा पाया। तब उसने यही सोचा की मैं किसकी शरण लू और प्रकाश को चुना। क्योकि वो उसकी उन्नति में साहयक था यो वो उसकी प्रसंसा के गीत गाने और लिखने लगा। जो तुम्हारे कथित धर्म शास्त्र है और मेरे विरुद्ध युद्ध छेड़ दिया। क्योकि उसे लगता है मैं उसकी उन्नति रोकता हूँ। यो वो मुझसे भयभीत रहने लगा और मेरी बुराई करता मुझे निन्दित करता है और इस युद्ध में जाने कितने युगांतर निकल गए और निकलेंगे इसके आगे शैतान बोला की इस पृथ्वी पर जितनी भी भविष्यवाणियों का जन्म हुआ है। वो सब मेरे ही कारण हुआ है इसको जिस मनुष्य ने जान लिया वही मेरा उपासक बना। और मुझे लोगों के सामने रखकर एक व्यवसाय बना लिया और मेरे भय से मुक्ति का एक सम्पूर्ण विस्तृत विषय बनाकर लोगों को मेरे खिलाफ भड़का कर अपना कार्य सफल करने लगा और उन्हें बताया की जो मेरे इस ज्ञान को अपनाएंगे। वो ही शुद्ध बुद्ध ह्रदय वाली श्रेष्ठ आत्माएं है उन्हें ही वो उस अनन्त प्रकाश के पीछे का सत्य उपलब्ध होगा, वही उस प्रकाश के पीछे के अद्रश्य लोक में जा पाएंगे जहाँ तुम्हारा सदा भला करने वाला कोई है। जिसके ये सारे नाम है ईश्वर अल्लाह गॉड आदि वहां सभी कुछ अमर और आनन्द देने वाला एश्वर्य है। आओं मेरे साथ उसी परमेश्वर को पुकारे और यही पुकार दिव्य मंत्र” की-हे-सुख स्वरूपी दुःख विनाशक परमात्मा मुझे इस अंधकार से प्रकाश की और ले चल” और तेरे आलावा कोई नही है। जो पूजनीय हो यो तू ही सर्वश्रेष्ठ है।और मनुष्य को उस ईश्वर और मेरे बीच का एक सेतु मानते है। जिस पर से दोनों और जाया जा सकता है और जिसने इस रहस्य को जान लिया वो उस ईश्वर और मेरे शैतान दोनों के अज्ञान से मुक्त है। यही यथार्थ मोक्ष कहलाता है। लेकिन इस सत्य को कभी इन कथित धार्मिक ज्ञानियों ने मनुष्य को जानने नही दिया और जिस मनुष्य ने ये ज्ञान जान लिया। उसके जाने के बाद इन कथित धार्मिक ज्ञानियों ने फिर से उसको भी उसी ईश्वर का प्रतिनिधि रूप “नाम” रखकर अपना पुराना व्यवसाय प्रारम्भ कर दिया और उसके भी नाम से मन्दिर बनवा दिए और यही करते आज तक आनन्दित है।
यो मैं ही वो साहस और दृढ़ निष्ठा हूँ जिसके होने से तुममे धार्मिकता का नियम और विश्वास आता है और मैं ही वह ऊर्जा का स्रोत हूँ जो तुम्हारी सारी अपूर्व भावनाओं को उभारता और उत्साहित करता है।
मैं अजर अमर नित्य शैतान हूँ। जिसके साथ तुम लोग सदा युद्ध करते हुए जीवित हो यदि तुमने मुझसे युद्ध करना बन्द कर दिया तो तुम आलस्य से भर उठोगे तुम्हारा मष्तिष्क कुंद और स्पंदनहीन हो जायेगा तुम्हारी आत्मा मर जायेगी।
मैं ही तुम्हारी आत्मा की ऊर्जा शक्ति ओर भक्ति हूँ जिसके जागने और जगाने को तुम मन्दिर,मठ,तीर्थों की और भागते हुए शरण लेते हो।
यो मेरी प्रसन्ता से तुम प्रसन्न हो यो मुझसे वेमनस्य मत करो मुझे जानो।
ये सब सुन उस सन्त ने उस शैतान को नमन किया और उसकी सेवा इस ज्ञान भाव से करने की सोची की ये भी मैं ही हूँ। जैसे मैं अच्छाई की सेवा करता हूँ ठीक ये बुराई भी मेरा ही गुण है। इसी के संशोधन से ही अच्छाई बनती है। अँधेरा ना हो तो उजाले का क्या महत्त्व समझ आये और काम,क्रोध,लोभ,मद-अहं ये अष्ट विकार ना हो तो दया,प्रेम,शांति आदि अष्ट सुकार कैसे समझ आये और उपयोगी हो यो ये सब मेरे ही गुण अंग है ये मैं ही हूँ यो मैं अपनी ही सेवा करता स्वयं में प्रसन्न और धार्मिक हूँ। यही ज्ञान मुझे इस रूप में मिला यही मेरा मोक्ष ज्ञान है यही सत्य है यही मेरा शाश्वत रूप है यो अहम् सत्यास्मि हूँ।यही सत्यास्मि ज्ञान है।। ये सत्य ज्ञान देवी पूर्णिमा से अमावस देवी ने सुन का बड़ा आत्मसन्तोष व्यक्त करते धन्यवाद दिया की हम दोनों एक ही है हमारा अपना अपना समान महत्त्व है।
और दोनों ने अपना आत्मघोष किया
जय सत्य ॐ सिद्धायै नमः
शैतान बाइबिल:-
जैसे-बाइबिल ईसाईयों का प्रमुख धर्म ग्रन्थ है।और हिंदुओं के वेद व् मुस्लिम की कुरान आदि ग्रन्थ ठीक वेसे ही इनके विपरीत इन सभी विश्व धर्मगर्न्थो में शैतान,राक्षस,दैत्य,लुसिफर आदि अनेक नाम से वर्णित इस अधार्मिक व्यक्तित्व की भी एक धर्म और उसका ग्रन्थ है जिसे शैतान की बाइबिल कहा जाता है..आओ उसके बारे में जानते है..
कहा जाता है कि बाइबिल में ईसा मसीह की शिक्षाएं लिखी है और बाइबिल स्वयं ईश्वर का लिखा ग्रन्थ है।
समय समय पर बाइबिल में अलग अलग चीज़ें जोड़ी गयी। आज जो बाइबिल पढ़ी जाती है वो बाइबिल अपनी मूल बाइबिल से काफी अलग है।
क्या आप जानते है कि इश्वर द्वारा लिखी बाइबिल के अलावा भी एक बाइबिल खोजी गयी है।
इसे शैतान की बाइबिल कहा जाता है।
यदि मिथकों की माने तो ये बाइबिल शैतान के आदेश पर लिखी गयी थी।
आज ये पुस्तक स्वीडन के राष्ट्रीय पुस्तकालय में संरक्षित है। ये पुस्तक हर मायने में बहुत खास है।
ये प्राचीन बाइबिल मध्ययुगीन किताबों में सबसे बड़ी है। इसमें कागज़ की जगह चर्मपत्रों का उपयोग किया गया है।
इस पुस्तक का आकर इतना बड़ा है कि इसे खोलने और उठाने के लिए कम से कम दो व्यक्तियों की ज़रूरत पड़ती है।
इस बाइबिल में करीब 160 चर्मपत्रों का उपयोग किया गया है।
इस बाइबिल में वो सब भी है जो ईसाई बाइबिल में है। लेकिन इस शैतान की बाइबिल में सबसे रहस्यमयी बात जो है, वो ये है कि इस पुस्तक की शुरुआत में ही एक विशाल चर्मपत्र पर शैतान का चित्र बनाया गया है।
इस पुस्तक का वजन करीब 85 किलोग्राम है। कहा जाता है कि इस पुस्तक को 13वीं सदी में लिखा गया था।
एक रात में लिखी थी ये विशाल पुस्तक..
मानने वाले कहते है कि शैतान ने एक व्यक्ति को अपने वश में करके एक रात में ही ये विशाल पुस्तक लिखवाई थी।
शोधकर्ता इस बात को मानने से पहले तो इंकार करते रहे थे, उनके अनुसार इतनी बड़ी पुस्तक लिखने के लिए उस समय की तकनीक के अनुसार कम से कम 30 वर्षों का समय लगना चाहिए।
लेकिन बाद में जब शैतान की बाइबिल की जांच की गयी तो वैज्ञानिक और पुरातत्ववेत्ता भी आश्चर्यचकित हो गए। ये पुस्तक हाथ से लिखी गयी है और जब लिखी की जांच की गयी तो पता चला कि ये पुस्तक एक ही व्यक्ति ने लिखी है।
३० साल तक लगातार एकदम एक जैसी लिखी में लिखना किसी के लिए भी असम्भव है। अधिक जांच करने पर पता चला कि इस पुस्तक को बहुत ही थोड़े समय में लिखा गया है।
इसका मतलब ये कि शैतान की बाइबिल को लिखने में कहीं ना कहीं किसी काली शक्ति का हाथ था। एक साधारण मनुष्य के लिए इतनी विशाल पुस्तक इतने कम समय में लिखना असम्भव है।
नेशनल जिओग्राफिक के अनुसार यदि इस पुस्तक का लेखक दिन रात बिना रुके काम करता तो भी उसे कम से कम 25 वर्ष लगते इस बाइबिल को पूरा करने में, लेकिन अक्षरों की सम्मिति और लिखावट ऐसी है कि लगता है ये पुस्तक बहुत कम समय में पूरी की गयी थी।
अब इस शैतान की बाइबिल के पीछे का सच क्या है और इसको किसने लिखा ये अब तक रहस्य ही है।
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श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येंद्र जी महाराज
जय सत्य ॐ सिद्धायै नमः
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