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जम्मू कश्मीर : महीनों से स्थगित विधान सभा को राज्यपाल ने तब भंग कर दिया,जब बहुमत के साथ सरकार बनाने का दावा पेश किया गया

 

 

 

 

जम्मू कश्मीर में दूसरे दल एकसाथ होकर जैसे ही बहुमत के साथ सरकार बनाने का दावा पेश करने जा रहे थे कि तभी राज्यपाल ने विधानसभा भंग कर दी।

 

 

 

भारतीय राजनीति भी क्या अज़ब गज़ब है। हम करें तो देशहित दूसरा करे तो देशद्रोह। हम चाहे किसी के साथ भी मिलकर सरकार बनाएं लेकिन हमारे अलावा कोई दूसरा आ जाये वो गवारा नहीं।

यह हालात हैं आजकी भारतीय राजनीति के। आजकी भारतीय राजनीति कुर्सी की राजनीति हो गयी है।
आज इसी राजनीति पर हम बात कर रहे हैं जम्मे कश्मीर के मुद्दे पर। जहां भाजपा और पीडीपी की संयुक्त सरकार हुआ करती थी लेकिन 3 साल चले इस गठबंधन ने एक दूसरे के ऊपर आरोप लगाते हुए अलग होने का फैसला किया। लेकिन कई महीने बीत जाने के बाद भी किसी के साथ में कोई दल नहीं जुड़ा जिससे कि सरकार बनाने का दावा पेश किया जा सके। लेकिन कई महीनों बाद की मशक्कत करके जब दूसरे दलों ने कोशिश की तभी राज्यपाल ने जम्मू कश्मीर की विधानसभा को भंग कर दिया।

बता दें कि एक नाटकीय घटनाक्रम में बुधवार रात को जम्मू और कश्मीर विधानसभा को भंग कर दिया गया। इससे पहले मुख्यधारा के तीन दलों ने साथ मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश किया गया, वहीं, इसका विरोध करते हुए भारतीय जनता पार्टी समर्थित पीपल्स कांफ्रेंस के नेता सज्जाद लोन ने भी सरकार बनाने का दावा पेश किया था।

राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने एक संक्षिप्त बयान में घोषणा की कि वे जम्मू और कश्मीर के संविधान से मिली शक्तियों का उपयोग करते हुए विधानसभा को भंग कर रहे हैं, जिसका कार्यकाल अभी दो साल बाकी था।

विधानसभा को भंग करने की घोषणा से तुरंत पहले पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी), नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस ने साथ मिलकर सरकार बनाने का दावा किया था। वहीं, भाजपा भी पीडीपी के विद्रोही विधायकों और सज्जाद लोन के साथ मिलकर सरकार बनाने की कोशिश में जुटी थी।

पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती ने देर शाम राज्यपाल को पत्र लिखकर कहा था कि कांग्रेस और नेशनल कांफ्रेंस ने उनकी पार्टी को सरकार बनाने के लिए समर्थन देने का फैसला किया है।

लोन ने इसका विरोध करते हुए राज्यपाल को पत्र लिख कर भाजपा की मदद से सरकार बनाने का दावा पेश किया। उन्होंने 18 विधायकों के साथ भाजपा के 25 विधायकों की मदद से सरकार बनाने का दावा पेश किया और कहा कि यह बहुमत से अधिक है।

वहीं, मुफ्ती ने अपने पत्र में लिखा कि उनकी पार्टी के 29 विधायकों के अलावा नेशनल कांफ्रेंस के 15 और कांग्रेस के 12 विधायकों को मिलाकर उनकी संख्या 56 हो जाती है।

महबूबा ने राज्यपाल (जो शादी समारोह में शामिल होने के लिए चंडीगढ़ में थे) को भेजे पत्र में लिखा, ‘‘चूंकि मैं श्रीनगर में हूं। इसलिए तुरंत आपसे मिलना संभव नहीं होगा। इसलिए हम सरकार बनाने के दावे के लिए आपकी सुविधा के मुताबिक आपसे जल्द मुलाकात का समय मांगते हैं।’’

विधानसभा भंग होने से पहले पूर्व वित्त और शिक्षा मंत्री अल्ताफ बुखारी के पीडीपी-नीत गठबंधन सरकार के मुख्यमंत्री बनने की चर्चा चल रही थी।

87-सदस्यीय जम्मू और कश्मीर विधानसभा में भाजपा के 25 (सभी जम्मू से) विधायक हैं और कश्मीर घाटी की पीपल्स कांफ्रेस के दो विधायकों के समर्थन का पार्टी दावा करती है।

मुफ्ती ने कहा कि विचित्र है कि फैक्स से भेजे गए पत्र को राजभवन ने स्वीकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि वे राज्यपाल से फोन पर संपर्क करने की कोशिश कर रही हैं।


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