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आज बड़ा और विशेष मंगलवार है, यानि हनुमान जी का दिन, मंगल की हैरान कर देने वाली चमत्कारिक कथा, श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज की जुबानी

 

 

 

 

श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज आज एक ऐसी अदभुत, अद्वितीय कथा के बारे में बात कर रहे हैं जो बेहद चमत्कारिक ही नहीं बल्कि अपने में बहुत से राज भी समेटे हुए है।

 

आज मंगलवार है यानि महादेव के अंश, महादेव के रौद्र अवतार, श्री राम के परम भक्त श्री हनुमान का दिन है। और यह मंगलवार हर मंगलवार की तरह नहीं बल्कि बहुत विशेष है।

आजका दिन भगवान हनुमान का दिन है, बेहद खास दिन है। श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येन्द्र जी मजराज आज इस दिन का वर्णन कर रहे हैं।

 

बड़े मंगल की चमत्कारिक प्रमाणिक ऐतिहासिक लखनवी कथा:-

बड़े मंगल की हार्दिक शुभकामनाएं सहित मङ्गलमयी आशीर्वाद, बड़ा मंगल ज्येष्ठ माह के प्रत्येक मंगलवार को मनाया जाता है, लखनऊ में तो यह पर्व बहुत हर्ष उल्लास से मनाते हैं, विशेष कर हनुमान भक्त तो साल भर इस पर्व की प्रतीक्षा करते हैं, इस दिन लोग हनुमान जी के मंदिर जाते हैं, दर्शन करते हैं, पूजा करते हैं, प्रसाद चढ़ाते हैं, बहुत बड़े स्तर पर भण्डारे इत्यादि का आयोजन किया जाता है. लखनऊ में तो चारो ओर तो केवल हनुमान जी की ही जयजयकार ही सुनाई देती है, यहां तक लखनऊ व आसपास के क्षेत्रों में तो हर सड़क, गली मोहल्ले में आप हनुमान जी के भक्तो में हर्ष उल्लास देख सकते हैं. परन्तु क्या आप जानते हैं कि- हनुमान जी से सम्बंधित इस महापर्व (बड़ा मंगल) का प्रारम्भ कब और कैसे हुआ और किसने इसकी नीव डाली ?

आइये हम आपको इसका इतिहास बताते हैं, ये घटना लगभग 400 साल पुरानी है की-एक रात अवध के शिया नवाब शुजा-उद-दौला की पत्नी जनाब ए आलिया बेगम के स्वप्न में हनुमान जी स्वयं प्रकट हुए और उन्हें निर्देश दिया कि अमुक स्थान पर धरती मे मेरी मूर्ती भूमि में दबी है,जाओ उसे निकालो, बेगम आलिया ने हनुमान जी द्वारा चिन्हित स्थान पर खुदाई प्रारम्भ करवाई, बहुत देर हो गयी, परन्तु हनुमान जी की मूर्ती के दर्शन तक नहीं हुए और ये देख वहां उपस्थित सुन्नी मुसलमान दबी ज़बान में बेगम साहिबा का मज़ाक उड़ाने लगे, परन्तु बेगम साहिबा तनिक भी विचलित नहीं हुई, उन्होंने हाथ जोड़कर करुण स्वर में हनुमान जी से प्रार्थना करी कि- आप ही के आदेश पर मैंने खुदाई शुरू करवाई है, अब मेरे साथ साथ आपकी इज़्ज़त भी दाव पर लगी है, इधर बेगम साहिबा की प्रार्थना पूरी भी नहीं हुई थी कि- जय हनुमान के नारे लगने लगे,ठीक उसी स्थान पर हनुमान जी की मूर्ती प्रकट हो चुकी थी, बेगम आलिया की आँखों में श्रद्धा और विश्वास के आंसू थे।

बेगम आलिया ने आदेश देकर एक हाथी मंगाया और उसकी पीठ पर हनुमान जी की मूर्ती को स्थापित कर आदेश दिया कि- हाथी को आज़ाद छोड़ दो अब जहाँ यह हाथी रुक जायगा, वहीं हनुमान जी का मंदिर बनाया जाएगा, क्योकि यह सम्पूर्ण अवध क्षैत्र हनुमान जी का ही है और उनका मंदिर कहाँ बनाया जाय? इसका निर्धारण भी स्वयं हनुमान जी करेंगे।

अब यह हाथी चलता चलता हुए अलीगंज में एक स्थान पर,जहाँ आज ये मन्दिर है,ठीक वहीं जाकर रुक गया और बेगम साहिबा ने उसी स्थान पर मंदिर निर्माण करवाकर हनुमान जी की मूर्ती स्थापित कर दी. बेगम आलिया ने इसी हनुमान मंदिर में मंगलवार को पुत्र रत्न की मन्नत मानी जिसे हनुमान जी ने पूरा किया और बेगम आलिया को मंगलवार ही के दिन पुत्र नवाब सआदत अली खां-!! पैदा हुआ, जिसका नाम बेगम आलिया ने ” मिर्ज़ा मंगलू ” रखा. और यहीं से “बड़े मंगल” पर्व का प्रारम्भ हुआ और तब से आज तक भक्तों की मनवांछित मनोकामनाएं पूरी हो रही हैं।

भक्तों- शिया नवाबो पर हनुमान जी की कृपा यहीं तक नहीं रुकी, बल्कि जब भी आवशयकता हुई हनुमान जी उनके लिए संकट मोचन बने, आगे चलकर जब अवध के शिया नवाब मोहम्मद अली शाह का पुत्र घातक रूप से बीमार हुआ और सारे हकीमो और वैद्धों ने जवाब दे दिया तो नवाब साहब की पत्नी बेगम राबिया अपने बीमार पुत्र को लेकर इसी हनुमान मंदिर में पहुंची और पुजारी जी के कहने पर रात भर के लिए अपने पुत्र को हनुमान जी की शरण में छोड़ दिया, अगले दिन सुबह जब सब लोग मदिर पहुंचे तो नवाब साहब का पुत्र चमत्कारिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ हो चुका था. इस प्रकार शिया रियासत में चारों ओर हनुमान जी के नाम का जयकारा गूंज उठा और इस प्रकार से बड़े मंगल को शिया नवाबों द्वारा और भी विराट रूप प्रदान किया गया, जो आज भी उसी उत्साह से जारी है, और बड़े हनुमान जी की कृपा से लोगों की मनवांछित इच्छाएं पूरी हो रही हैं।

तथा शिया नवाबों पर हनुमान जी की कृपा और भी आगे तक जारी रही और यो ही शिया नवाबों ने भी अपनी श्रद्धा में कभी कमी नहीं आने दी, नवाब शुजा-उद-दौला व अन्य शिया नवाबों ने ने अवध प्रांत में जगह जगह अनेकों मंदिर निर्मित करवाए, जिसमे अयोध्या का विश्वविख्यात “हनुमान गढ़ी मंदिर” का निर्माण भी शामिल है,और जिसमें उनके बाद के शिया नवाबों ने भी लगातार अपना योगदान जारी रखा।

उधर सुन्नी मुसलमानों ने भारी विरोध के बावजूद भी आज शिया मुसलमान जब हिन्दुओ के साथ मिलकर बड़े मंगल पर भण्डारों इत्यादि का आयोजन करते हैं तो- अधिकतर कट्टरपंथी इस बात को लेकर एतराज करते हुए अपना मुह छुपाते नज़र आते हैं।

भक्तों- इस लखनवी एतिहासिकी प्रमाणिक धर्म से परे श्रद्धा और आस्था के इस चमत्कार से आप सभी को पूर्ण विश्वास हो गया होगा कि- हनुमान जी के आशीर्वाद से शिया हिन्दू एकता कभी समाप्त नहीं होगी, इस प्रकार आप भी इस बड़े मंगलवार को अपने यहां मनाये और बाबा संकट मोचन हनुमान जी आपकी हर कठिनाई को दूर करें,ऐसा हमारा विश्वास है।

“2018 जून में अभी 3 और बड़े मंगलवार पड़ेंगे।”

आज क्या करें-आज आप भी हनुमान जी पर घी सिंदूर को अपने हाथों से मल कर उनकी सेवा करें और घी अखण्ड दीपक जलाकर 7 बार हनुमान चलिसा पढ़े,साथ ही उन पर चांदी के वर्क लगाये और गुलदान का और लड्डू का प्रसाद बांटे।और बन्दरो और कुत्तों को गुड़ रोटी का चूरमा बनाकर अवश्य बांटे,तो अवश्य चमत्कार पाएंगे।

आज के बड़े मंगलवार के दिन हनुमान जी महाराज के समस्त भक्तों से निवेदन है कि- इस पोस्ट को अधिक से अधिक शेयर करें और हनुमान जी कृपा पाएं।

 

 

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श्री सत्यसाहिब स्वामी श्री सत्येन्द्र जी माहारज की तरफ से यह ज्ञान निशुल्क दिया जा रहा है यदि आप सत्यास्मि मिशन का हिस्सा बनना चाहते हैं श्री सत्यसिद्ध शानिपीठ से जुड़ना एवं दान करना चाहते हैं। या शनिवार को होने वाले भंडारे, विशेष पूजा में योगदान करना चाहते हैं तो यहाँ दान कर सकते हैं…।

 

“ॐ हं हनुमंते रुद्रात्मकाय हुं फट्”

“श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येंद्र जी माहारज”

!!जय सत्य ॐ सिद्धायै नमः!!


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