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Happy Women’s Day…. खुशी मनाइये इस खोखली आज़ादी की

 

 

“वैसे अच्छा वुमेन्स डे है ना… महिलाएं आज भी अपनी आजादी के लिए हाथ पैर मार रही हैं। अभी देखना कुछ मानसिक बीमार मेरे इस पोस्ट पर भी उलटा कुलटा कमेंट करेंगे। ये वही मानसिक बीमार हैं जो उसी महिला के पेट से आये हैं जिसे ये आज़ाद नहीं होने देना चाहते हैं। पहले बेटी, फिर पत्नी, फिर माँ… सिर्फ गुलामी के लिए बनी है।”

 

 

हमारे दोगले समाज में कहा जाता है कि बेटी घर से बाहर नहीं निकलना तेरे साथ अनर्थ हो जाएगा… लेकिन कोई अपने बेटे को यह नहीं कहता..। कोई अपने बेटों को नहीं समझाता कि बेटा किसी बेटी को न छेड़ना, हसे तंग न करना, बेटी भी घर की इज्जत होती है उसकी इज्जत से खिलवाड़ न करना।
बेटों को लाइसेंस प्राप्त है।

एक बेटी जब कहीं जॉब करती है वो अपने पैरों पर खड़े होने का सपना देखती है तो वो लोगों के निशाने पर आ जाती है।
घर में भी बेटी असुरक्षित, किसी का भाई, चाचा, मामा, फूफा, जीजा, बाप न जाने कितने ऐसे किस्से हैं जिनकी वजहों से बेटियां बर्बाद हुई हैं। कितनी बेटियां ऐसे किस्सों की वजह से तंग आकर अपनी जान तक दे देती हैं।

यह मज़ाक है या हकीकत? क्योंकि बेटियों में संभावना नहीं बल्कि राह चलती बेटी को संभावना समझा जाता है।

 

बेटी अगर रात में घर से निकल जाए तो वो लोगों के लिए अपॉरचुनिटी बन जाती है। लोग उसे इस कदर देखते हैं कि बस अब तो सब हो जाएगा।
लेकिन कोई उसकी मजबूरियों को नहीं देखता।
बेटा आज भी हमारे इस समाज में कुछ भी कर सकता है। लेकिन बेटियों को कुछ भी करने की आज़ादी नहीं है।

मैं आज सच्चे दिल से अपने माँ बाप अपने भाई का धन्यवाद करना चाहती हूँ। क्योंकि उन्होंने मुझे एक हिम्मतवाली बेटी बनाया, मेरा भाई मेरी हिम्मत है और मेरे माँ बाप मेरी जान। मैं घर पर अगर कहती हूँ कि आज मेरे साथ ऐसा हुआ मुझे किसी ने छेड़ा तो मेरा भाई मुझे यह नहीं कहता कि पता बता, या मैं देख लुंगा। वो मुझे डांटता है, मेरे ऊपर गुस्सा करता है और कहता है कि तूने उसे जिंदा जैसे छोड़ दिया, जब तुझे समझाया था, सिखाया था तो तूने उसे नपुंसक क्यों नहीं बना दिया? मेरे माँ बाप ने मुझसे कभी नहीं कहा कि तू बेटी है बेटियों की तरह रह। मेरे घर में मेरे भाई को जो अधिकार हैं उससे कहीं ज्यादा मुझे अधिकार मिले हैं। मैं आज इतनी मजबूत हूँ कि मैं ख़ुद इस खोखले समाज का सामना बड़ी आसानी से कर सकती हूँ।
मेरा मानना है कि जैसे मैं मजबूत हूँ देश की हर नारी ऐसे ही मजबूती के साथ आगे बढ़े।
महिलाएं अगर घर की इज्जत हैं तो उन्हें बाहर भी उन्हें इज्जत मिले। उन्हें महिला होने के नाते इज्जत नहीं बल्कि एक इंसानों वाली इज्जत मिले।

एक छोटा सा किस्सा शेयर कर रही हूँ। ये सच्चा किस्सा है आपके आस पास का ही किस्सा है।

एक बिटिया जिसकी आंखों में बहुत सारे सपने थे, अरमान थे। उनके मां बाप भाई यानी उसका पूरा परिवार उसे जी जान से चाहता था। वो स्कूल जाती थी 11वीं क्लास में पढ़ती थी। वो पढ़ने में बहुत होशियार थी। वो अपनी मां से कहती थी कि माँ देखना एक दिन मैं बहुत बड़ी पुलिस अफसर बनुँगी, और सब गुंडे बदमाशों को जेल में डाल दूंगी, तो उसका भाई चुटकी लेता था कि बन जाना मैं सिपाही बन जाऊंगा तुम ऑडर किया करना और मैं गुंडों को पकड़ कर लाया करूँगा।
सब हसी खुशी से रह रहे थे। उसका परिवार बेटी पर नाज़ करता था। करे भी क्यों ना वो अपने छोटे भाई को भी पढ़ाती थी, खुद भी पढ़ती थी। घर में अपने भाई के बराबर ही वो काम भी करती थी।

लेकिन एक दिन कुछ ऐसा हुआ कि उस घर का सब उजड़ गया। क्या माँ, क्या बाप, भाई, चाचा, चाची, बूढ़े दादा-दादी सब अपनी छाती पीट पीट कर रो रहे थे। भाई अपना सर तेज़ तेज़ दीवार में मार रहा था। तो उसकी माँ और पिता को रोते-रोते होश नहीं आ रहा था। पड़ोसी सब स्तब्ध थे। हर तरफ मातम का माहौल था। जानते हैं यह सब क्यों हो रहा था। क्योंकि उस बेटी की किसी ने सांसे छीन ली थी।

वो बेटी जिस स्कूल में पढ़ती थी वहीं पास में ही एक छिछोरा लड़का हमेशा उसका पीछा करता था, उसका बाप रसूखदार नेता था। वो बिटिया का कभी दुपट्टा खींचता तो कभी अपने दोस्तों के साथ उस बिटिया पर फब्तियां कसता। और जानते हैं वो बिटिया न कभी सॉर्ट कपड़े पहनती थी ना कभी ऐसे भड़कीले कपड़े पहनती थी। वो तो किसी से बात भी नहीं करती थी नज़रे झुकाकर चलती थी। लेकिन न जाने कहाँ से उसको नज़र लग गयी। और उस हैवान ने बिटिया का अपने दोस्तों के साथ मिलकर अपहरण कर लिया। उसकी अस्मत के साथ खेला अपने दोस्तों को भी उस बिटिया को नोचने के लिए दिया। इसके बाद बिटिया को धमकाया कि अगर तूने किसी को कुछ भी बताया तो तेरे पूरे खानदान को नष्ट कर देंगे। बिटिया अपने साथ हुए घिनोने कृत्य से इतने सदमें में थी कि उसे कुछ न सूझा न समझ आया। उसने अपने बैग में से एक पेपर निकाला और उस पर लिखा। भाई मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूं। माँ तुम मेरी जान हो। पापा आपकी शान अब नहीं रही। मैं जा रही हूँ। भाई को कहना वो खूब पढ़े और आपका नाम रोशन करे। मैं किसी को मुंह दिखाने के काबिल न रही। अगर मैं जिंदा बच गयी तो वो फिर मुझे दोबारा नोचेंगे। समाज मेरे परिवार को जीने नहीं देगा।
भाई तुम बड़े होकर हर बहन की इज्जत करना। पापा मम्मी जो मैंने सोचा था उस हर चीज को छोड़कर जा रही हूँ। मैं बेटी हूँ एक अभागी बेटी जो आप जैसे माँ बाप ले लाड़ प्यार को जिंदगी भर के लिए अपने साथ न रख पायी। न आपका नाम रोशन कर पाई। जिंदा रही तो हर कोई मुझपर और मेरे परिवार पर उंगली उठाएगा। इसी वजह से मैं अपनी जान दे रही हूं।

आपकी अभागी बिटिया।

और इसके बाद वो बिटिया एक चलती ट्रेन के आगे कूद गई।

उन हैवानों ने उस प्यारी बिटिया को जिस कदर नौंचा था उसी तरह उस बिटिया के चिथड़े उड़ गए। और साथ ही चिथड़े उड़ गए उस समाज की घिनोनी सोच के जिस समाज का वह हिस्सा थी।
वो पुलिस अफसर बनना चाहती थी जानते हैं क्यों…? क्योंकि वह हैवान उसे काफी समय से परेशान कर रहा था। उसने अपने माँ बाप को भी बताया था तो माँ बाप शिकायत लेकर गए थे उस नेता के घर। नेता ने आश्वासन देकर भेज दिया था बोला कुछ नहीं होगा ये तो ऐसे ही मजाक करता रहता है इसको हम समझा देंगे। इसके बाद उस हैवान ने और ज्यादा बिटिया को परेशान करना शुरू कर दिया। इसके बाद बिटिया ने फिर अपने घर बताया। तो चाचा ने उस लड़के को पीटा और पुलिस में शिकायत कर दी। नेता का वो हैवान बेटा अपनी पिटाई को सह नहीं पाया वो इस बेज्जती का बदला लेना चाहता था। और इसके बाद की कहानी आपको पता ही है।

यह समाज वही है जो अपने साथ हुई बेइज्जती का बदला तो लेना चाहता है लेकिन किसी की इज्जत के साथ खिलवाड़ करके। यहाँ पर उस बिटिया के साथ जो वो हैवान कर रहा था तो वह उसका अधिकार था। लेकिन जब उस हैवान के इस कृत्य की शिकायत हुई तो उसकी बेज्जती हो गयी।

आज भी वह परिवार इस सदमें से नहीं उभर पाया है। नेता का बेटा बेल पर बाहर आ चुका है। और फिर से वो वैसी ही जिंदगी जी रहा है।

यह एक नहीं, सैकंडों नहीं बल्कि हज़ारों कहानियां हैं। ये कहानियां न जाने कब रुकेंगी? कब महिलाएं अपनी आजादी को मना सकेंगी। 15 अगस्त हमारे लिए नहीं बल्कि पुरुषों के लिए हैं। ऐसी आज़ादी आप सबको मुबारक हो।

जय हिंद, जय भारत।

माही गुप्ता।

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