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तो क्या वाकई बोगस निकला “निजता का अधिकार” (Right to Privacy) ये विदेशी कंपनियाँ अभी भी कर सकती हैं हमारा डेटा एक्सेस?

 

माननीय सुप्रीम कोर्ट ने निजता के अधिकार को लेकर एक बहुत बड़ा फैसला दिया था जिससे कि कोई भी कंपनी हमारी जानकारी को सार्वजनिक नहीं कर सकती है। लेकिन विदेशी कंपनियां हमारी जानकारी को आराम से एक्सेस कर सकती हैं, ये एक बड़ा खुलासा एक आरटीआई से हुआ है।

आपको बता दें कि विदेशी कंपनियां आधार के क्लासिफाइड डाटा को एक्सेस कर सकती हैं। आरटीआई में किए गए एक खुलासे से पता चला है कि आधार नंबर जारी करने वाली संस्था यूनिक आईडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया के साथ काम कर रहीं विदेशी कंपनियों सभी प्रकार का डाटा एक्सेस कर सकती है। ये एक बड़ा और गंभीर खुलासा है क्योंकि आधार बनाने से पहले सरकार ने इसके पूर्ण रूप से सुरक्षित होने के दावे किए थे किंतु ऐसा संभव होता नजर नहीं आ रहा है। आज आधार कार्ड हमारी उस हर चीज से जोड़ दिया गया है जिसमें हमारी सभी जानकारियां सर्व निहित हैं।

एक ख़बर के मुताबिक, बंगलुरू के रहने वाले कर्नल मैथ्यू थॉमस द्वारा दायर की गई आरटीआई में जानकारी दी गई है कि सभी विदेशी कंपनियों को लोगों के फिंगरप्रिंट्स, आंखो की पुतलियों का स्कैन और पर्सनल जानकारी जैसे कि जन्मतिथि, पता और मोबाइल नंबर की जानकारी का एक्सेस है। कर्नल मैथ्यू सुप्रीम कोर्ट में दायर राइट टू प्राइवेसी मामले में याचिकाकर्ता भी हैं।

आरटीआई की जानकारी पूरी तरह से सरकार और यूआईडीएआई के दावे को पूरी तरह से खारिज करता है। इसके अनुसार कंपनियों के साथ किए गए कांट्रैक्ट के क्लॉज 15.1 में कहा गया है कि कंपनियां सभी प्रकार के डाटा और हार्डवेयर को एक्सेस कर सकती हैं। ये केवल उन कंपनियों के लागू है जो बॉयोमेट्रिक सर्विस प्रोवाइडर हैं।

विकिलीक्स ने खुलासा किया था कि अमेरिका की खुफिया एजेंसी सीआईए के पास आधार कार्ड के डाटा का एक्सेस है। विकिलीक्स का दावा है कि सीआईए ने इसके लिए यूएस की कंपनी क्रॉस मैच टेक्नोलॉजी के द्वारा तैयार किए गए डिवाइसेस की मदद से आधार डाटा को हैक कर लिया है।

विकिलीक्स के अनुसार सीआईए ने जिस कंपनी की मदद से आधार डाटा को हैक किया है उसी कंपनी की इंडियन इकाई आधार कार्ड बनाने वाली संस्था यूनिक आई़डेंटिफिकेश अथॉरिटी ऑफ इंडिया को बॉयोमेट्रिक डाटा लेने के लिए सॉफ्टवेयर तैयार किया है।

क्रॉसमैच का इंडिया में ऑपरेशन स्मार्ट आईडेंटिटी डिवाइसेस प्राइवेट लिमिटेड के साथ में पार्टनरशिप है। इसी कंपनी ने देश भर के 1.2 मिलियन भारतीयों के आधार कार्ड के लिए डाटाबेस इकठ्ठा किए थे।

विकिलीक्स ने शुक्रवार को ट्विट करके कहा कि क्या सीआईए के जासूसों ने भारत के नेशनल आईडी कार्ड डाटाबेस को चोरी कर लिया है? इसके कुछ देर बाद विकिलीक्स ने एक और ट्विट करके पूछा कि क्या सीआईए ने आधार डाटाबेस चोरी कर लिया? विकिलीक्स ने इसके साथ ही एक मैगजीन का में छपे आर्टिकल का लिंक भी शेयर किया।

हालांकि केंद्र सरकार ने विकिलीक्स के दावे को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। सरकार ने कहा कि यह विकिलीक्स का खुलासा नहीं है, ब्लकि एक वेबसाइट द्वारा बताया गया लीक है। सरकार ने कहा कि क्रॉस मैच बॉयोमेट्रिक डिवाइस बनाने वाली कंपनी है जो पूरे विश्व में इस तरह के डिवाइस सप्लाई करती है।

जो भी वेंडर आधार का डाटा कलेक्ट करते हैं वो इनक्रिप्टेड फॉर्म में आधार सर्वर को ट्रांसफर हो जाता है। सरकार ने कहा कि आधार का डाटा पूरी तरह से सेफ है और इसको किसी एजेंसी को देखने का अधिकार नहीं है।


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