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अमृतसर हादसा : जब नवजोत कौर अस्पताल में घायलों का कर रही थीं इलाज, तब सोशल मीडिया उन्हें भगौड़ा साबित करने पर तुला था

 

 

 

 

 

दशहरे की वो काली शाम जिसे अमृतसर के निवासी कभी नहीं भूलेंगे। इस शाम किसी ने अपने भाई को खोया तो किसी ने अपने बेटे को, किसी माँ की गोद सुनी हो गयी तो किसी का सुहाग उजड़ गया। लगभग 100 जानें दशहरे के मेले ने छीन लीं।

 

 

 

ट्रैन का अचानक से आ जाना, जब तक कि लोग संभल पाते काल का रूप धारण कर चुकी ट्रैन तब तक तो सैंकड़ों लोगों को रौंद चुकी थी और उसने अपने पीछे छोड़ी सिर्फ चीख पुकारें। लेकिन इसके बाद जो हुआ वह और भी भयावह था। कारण था सोशल मीडिया। आजकल सोशल मीडिया जबरदस्त अपवाहों का अड्डा बन चुका है। अनपढ़ और गंवार लोगों के हाथ में आया यह सोशल मीडिया गंभीर रूप धारण कर चुका है। यह जख्मों पर मरहम लगाने के बजाय नमक लगाता है।

 

हादसे के बाद लोग न जाने क्या क्या अनर्गल लिख रहे हैं। काश यह त्रासदी उन मानसिक बीमारों के ऊपर बीतती!

 

लोग लिख रहे हैं कि इस हादसे के जिम्मेदार वे खुद लोग हैं जो मरने के लिए ट्रैक पर खड़े हो गए थे। तो कुछ का कहना है कि इस हादसे की जिम्मेदारी राज्य सरकार की है। तो कुछ का कहना है को इस हादसे का कारण नवजोत सिंह सिद्दू की पत्नी नावजोत कौर हैं।

खैर कारण जो भी हो लेकिन ऐसी त्रासदी के बाद हम लोगों को इस दुख की घड़ी में शिकार हुए लोगों के परिवार वालों के साथ खड़ा होना चाहिए। हम कुछ नहीं कर सकते तो कम से कम अपनी जुबान पर लगाम लगा कर उन परिवारों को सांत्वना तो दे सकते हैं।

 

हादसे का वीडियो देखें

हम नवजोत कौर पर यह इल्जाम तो लगा रहे हैं कि नवजोत हादसे के बाद वहां से भाग खड़ी हुईं। तो यह सरासर गलत इल्जाम है। नवजोत भागीं नहीं बल्कि घायलों का इलाज करती देखी गईं। इस हादसे के बाद नवजोत काफी परेशान नज़र आईं, उन्होंने पूरी रात घायलों की सेवा की इतना ही नहीं अगले दिन भी वो इलाज करती तस्वीरों में नज़र आईं।

शुक्रवार शाम हादसे के तुरंत बाद नवजोत कौर सिद्धू के बारे में सोशल मीडिया पर यह खबर वायरल हुई कि वे हादसा होते ही समारोह से भाग गईं और भागने की हड़बड़ाहट में उनकी चप्पल भी टूट गई। नवजोत कौर के खिलाफ यह आरोप शनिवार को भी सोशल मीडिया पर चलते रहे लेकिन इसी दौरान कुछ ऐसे वीडियो क्लिप भी वायरल हुए हैं, जिनमें नवजोत कौर सिद्धू सरकारी अस्पताल में मोबाइल फोन की रोशनी में घायलों के जख्मों की स्टीचिंग, मरहम-पट्टी करती दिखाई दे रही हैं। पता चला है कि नवजोत कौर शुक्रवार को हादसे के कुछ समय बाद ही सरकारी अस्पताल पहुंच गई थीं, वे रात भर अस्पताल में रुककर अन्य डाक्टरों के साथ घायलों का इलाज करती रहीं।
इसके बाद अगले दिन भी नवजोत कौर अस्पताल में नज़र आईं और लोगों की मदद करते देखी गईं। नवजोत कौर ने किसी भी मीडिया से इस बाबत बात नहीं की वे चुपचाप अपना काम करती रहीं।

अमृतसर हादसे में उजड़े घरों में अब तक चूल्हा नहीं जला है। हर आम व खास व्यक्ति पीड़ितों की मदद को दौड़ रहा है। लेकिन यह दुखदाई घटना शनिवार सुबह से राजनीति की चपेट में आ गया है। इस मौके को राजनीतिक दलों ने राजनीति चमकाने का अवसर मान लिया है। शनिवार सुबह इसकी शुरुआत सबसे पहले भाजपा ने की और रेल पटरी पर धरना लगाकर नवजोत कौर सिद्धू को हादसे का जिम्मेदार ठहराते हुए उनके खिलाफ केस दर्ज करने की मांग उठाई।

इस धरने में भाजपा के राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर के अनेक नेता शामिल थे। अमृतसर पहुंचे सुखपाल सिंह खैरा ने इस हादसे के लिए केंद्र और राज्य सरकार दोनों के जिम्मेदार ठहराया। साथ ही स्थानीय प्रशासन की नाकामियां भी गिनाईं। खैरा ने पूरे सिस्टम को भ्रष्ट करार देते हुए कैप्टन अमरिंदर सिंह द्वारा हादसे की मजिस्ट्रेट जांच के एलान पर भी सवाल उठाए।

 

 

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Manish Kumar

Khabar 24 Express

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