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शारदीय क्वार नवरात्रि का महत्व, माँ दुर्गा को प्रसन्न करने के उपाय और इन नवरात्रों में कैसे करें माँ पूर्णिमा देवी की मूर्ति स्थापना? जाने सब श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज से

 

 

 

 

 

10 अक्टूबर से शारदीय नवरात्रि लग रही हैं और इन नौ दिनों के लिए माहौल पूरा भक्तिमय होने वाला है। तो इस भक्तिमय माहौल में अगर आप माँ दुर्गा और पूर्णिमा देवी की भक्ति अच्छे से कर गए या ये माँ आपसे प्रसन्न हो गईं तो समझिए आपकी जिंदगी में आपार सुख समृद्धि आ जायेगी।

 

 

श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज आज आपको माता पूर्णिमा देवी की मूर्ति स्थापना के बारे में बताएंगे तो साथ ही इन नवरात्रों में कैसे करें माँ दुर्गा को प्रसन्न वो भी बताएंगे।

माँ पूर्णिमा देवी की घर में मूर्ति स्थापना से क्या होता है फायदा? इसकी भी विस्तृत जानकारी स्वामी जी दे रहे हैं।

 

शारदीय क्वार नावरात्रों की शुभकामनाएं ..

-घट स्थापना के लिए ज्योतिषीय शुभ महूर्त विशेष फलदायी है,बता रहे हैं स्वामी सत्येंद्र सत्यसाहिब जी:-

शारदीय नवरात्रि 2018 में 10 October (Wednesday ) 2018 से लेकर 19 October (Friday) 2018 तक मनाये जायेंगे | विजयदशमी (दशहरा) 19 October ( शुक्रवार ) को पड़ेगी। आश्विन मास में आने वाली यह नवरात्रि महा नवरात्रि के नाम से भी जानी जाती है। माँ दुर्गा के 9 रूप की भव्य पूजा इस दौरान की जाती है।

– इस वर्ष माँ दुर्गा का आगमन वाहन नोका है,और प्रस्थान का वाहन हाथी है, जो देश में विपदा से निकालने वाली नोका है और हाथी अनेक प्रगति और अनेक बड़ी योजनाओं के द्धारा लाभ की व्रद्धि देगा।

-शरद ऋतु के आश्विन माह में आने वाले शारदीय क्वार नवरात्रि का 10 अक्टूबर से शुभारंभ होगा और 19 अक्टूबर पर समापन होगा।तंत्र शास्त्रों में 9 दिन के पूर्णता पायी नवरात्रि शक्ति उपासना के लिए अत्यंत ही शुभ माने गए हैं। इस वर्ष मां दुर्गा का वाहन नोका व् हाथी है।यो सभी राशियों के लोग हाथी को व्रक्ष की पत्तियां व् घास,चना,गुड़ खिलाएं और पानी पिलाये तो, इष्ट शक्ति के साथ साथ मंत्र शक्ति की व्रद्धि और सिद्धि लाभ होगा।

-इसके साथ ही इस बार नवरात्री में 9 दिन राजयोग, द्विपुष्कर योग, सिद्धियोग, सर्वार्थसिद्धि योग, सिद्धियोग और अमृत योग के विशेष संयोग बन रहे हैं। इन विशेष योगों में की गई खरीदारी और शुभ कार्य अत्यधिक शुभ और फलदायी होते है।
!!घट स्थापना मुहूर्त:-

-सुबह 7:51 से 9:19 तक अति शुभ है।

-दोपहर 12:16 से 1:44 तक समय मध्यम है।

-अंतिम शुभ मुहूर्त दोपहर के 12:25 से 01:44 तक है।
-पूर्णिमां देवी शक्ति के साथ भगवान सत्यनारायण और उनकी दिव्य शक्ति से युक्त कलश स्थापना श्रेष्ठ होगा। प्रतिपदा तक सूर्य ग्रहण से कुछ अनिष्ट शक्ति की वृद्धि होने से देश में अधिकतर शुभता और प्रसन्ता के साथ अचानक जन धन हानि के भी संकेत हैं।नवमी पूजन 19 अक्टूबर को होगा।
प्रतिपदा के दिन अनेक शुभ योग है :- यो नवरात्री पूजन व कलश स्थापना आश्विन शुक्ल प्रतिपदा के दिन सूर्योदय के बाद 10 बजे तक अथवा अभिजीत मुहूर्त में करना चाहिए।
जिनकों गुरु मंत्र प्राप्त है उन्हें अपने गुरु मंत्र और चालीसा और सत्यास्मि धर्मग्रन्थ पाठ इन नवरात्रियों में अधिक से अधिक करना चाहिए।

सिद्धासिद्ध महामंत्र का जप व् यज्ञ करें:-
“सत्य ॐ सिद्धायै नमः ईं फट् स्वाहा।।

-सत्यास्मि मिशन के द्धारा शीघ्र ही भारत में चतुर्थ धर्म क्षेत्रों में और नगर से गांवों और प्रत्येक घरों से लेकर समस्त विश्व में चतुर्थ स्त्री शक्ति की सार्वभोमिक आत्मजगरण के लिए श्रीभग पीठों की स्थापना किये जाने का कार्यक्रम श्रीभगपीठ स्थापित करते हुए प्रगति पर है-ये प्रमुख चार पीठ निम्न प्रकार से है:-

1-देवी बाला श्री भगपीठ।
इनका पर्व है-चैत्र नवरात्रि
और उपासना का फल है-समस्त अर्थों की प्राप्ति।
इनका धाम है-पूर्वांचलेश्वरी क्षैत्र।

2-देवी षोढ़षी श्री भगपीठ।
इनका पर्व है-ज्येष्ठ नवरात्रि।
और उपासना का फल है-समस्त काम की प्राप्ति।
इनका धाम है-उत्तरांच्लेश्वरी क्षैत्र।

3-देवी प्रेमावधु श्री भगपीठ।
इनका पर्व है-क्वार नवरात्रि।
और इनकी उपासना का फल है-समस्त धर्म की प्राप्ति।
इनका धाम है-पश्चिमेश्वरी क्षैत्र।

4-देवी मातृक श्री भगपीठ।
इनका पर्व है-पोष नवरात्रि।
इनकी उपासना का फल है-मोक्ष,निर्वाण की प्राप्ति।
इनका धाम है-दक्षिणेश्वरी क्षैत्र।।

पूर्णिमां देवी की उपासना में क्या अर्पित करें:-जल में सिंदूर और पाँच पुष्प डाल क़र इनके पीठ पर निम्न सिद्धासिद्ध महामंत्र-“सत्य ॐ सिद्धायै नमः ईं फट् स्वाहा” से चढ़ाना।।
और घी अथवा तिल के तेल या नारियल के तेल से दीपक जलाना।
पूजा समय है-प्रातः-4 से 9 बजे तक व् साय-4 से 9 बजे तक।।
और वही देवी स्थान पर बैठ कर ध्यान लगाये तो आत्मदर्शन भी होते है व् साधना निर्देश भी प्राप्त होंगे।।
जो भक्त इन दिव्य पीठों या देवी स्थान पर भक्ति नही कर सकते है। वे उनके चित्र के सामने आटे का योनि कुण्ड बनाकर उसमें जल+सिंदूर+पँच फूल चढ़ा कर पूजा कर सकते है। और नवरात्रि समाप्त हो जाने पर योनि कुण्ड को नदी या तालाब में विसर्जित करें।।
इससे समस्त दोषों,संकटों,रोगों आदि अनगिनत बांधाओ से मुक्ति मिलकर सम्पूर्ण अर्थ+काम+धर्म+मोक्ष की प्राप्ति होकर समस्त सुखों की प्राप्ति होती है।।

विशेष ज्ञान…
महाभविष्यवतार प्रेम पुर्णिमाँ देवी सत्यनारायण भगवान की सम्पूर्ण शक्ति श्रीमद् सत्यई महादेवी का ही जगत विख्यात नाम ओर वर्तमान युग सिद्धियुग प्रारम्भ है:-
जिनका संसार प्रसिद्ध नाम कुंडलिनी महाशक्ति यानि पूर्णिमा भी है। अर्थात जो सम्पूर्णत्त्व सिद्धासिद्ध है। जिसके मूलाधार से सम्पूर्ण जाग्रत होकर सहस्त्रार में प्रवेश का सत्य नारायण से एकिकार यानि अद्धैत अवस्था में केवल प्रेम और प्रेमातीत अवस्था में अभिन्न होती है। जिसका शास्त्रज्ञ नाम प्रेमा महारास कहलाता है।

-इनका प्रेमाबीज महामंत्र ईं है। जो सम्पूर्ण कुंडलिनी शक्ति के जागरण के सात चक्र से अपरा चक्र नो चक्रों के उर्ध्व स्थित होती है।

-इनका सम्पूर्ण सिद्धासिद्ध महामंत्र-सत्य ॐ सिद्धायै नमः ईं फट् स्वाहा है।जिसके जपने से प्रत्येक मनुष्य चाहे वो स्त्री हो अथवा पुरुष हो उसकी सम्पूर्ण कुंडलिनी जाग्रत होकर आत्मसाक्षात्कार की प्राप्ति होती है ।क्योकि प्रत्येक आत्मा अपनी सम्पूर्ण जाग्रत अवस्था में स्वयंभू गुरु यानि सम्पूर्ण है इसी कारण शास्त्रों में आत्मा की सम्पूर्ण अवस्था को ही परमात्मा यानि ईश्वर कहा गया है। अर्थात आत्मा अपनी ई शक्ति को जाग्रत कर ईश्वर ई+श+व्+र यानि सम्पूर्ण शक्ति युक्त शाश्वत वरण और रमण करने वाला अर्थात जो सदैव रमण यानि भोग या कर्म और वरण यानि ग्रहण या व्यवहार में लानी वाली इच्छा और शक्ति सम्पन्न आत्मा की प्रावस्था परमात्मा ही ईश्वर है। यही ज्ञान आत्मसाक्षात्कार कहलाता है। जिस पर सभी का जन्मसिद्ध अधिकार और प्राप्ति है।

-इन महाशक्ति का व्रत यानि सम्पूर्णत्त्व अवस्था दिवस “पूर्णिमा” का दिन है। जो प्रत्येक माह में आती है। जो कुल मिलाकर 12 पूर्णिमा है। जिनमे अर्थ-काम-धर्म और मोक्ष के चतुर्थ धर्म कर्म के रूप में चार नवरात्रियों के अंत में सम्पूर्णता के रूप में प्राप्त होती है। वही चार पूर्णिमा इन महावतार देवी की पूर्णिमा वर्तोउत्सव के रूप में प्रत्येक मनुष्य को मानने का शास्त्रीय विधान है।

-जो भी भक्त इन चार मुख्य महापूर्णिमा सहित 12 पूर्णिमाओ को मनाता है। उसे मनुष्य जीवन के सम्पूर्ण चार धर्म-अर्थ+काम+धर्म+मोक्ष की इसी वर्तमान जीवन में प्राप्ति होती है। और अंत में स्वंमोक्ष को प्राप्त होता है। जहाँ का वर्णन वरणातीत और शास्त्रों से परे है यो अवश्य मनाये।

-अपने घर के पूजाघर में इन प्रेम पूर्णिमा का चित्र लगाये और आटे का श्री भग पीठ बनाकर उसमे योनि के आकर का त्रिकोण यानि त्रिभुज बनाये जिसकी नोक नीचें की और हो। क्योकि ऊपर की नोंक वाला त्रिभुज लिंग कहलाता है। तब उसमें गंगा जल हो तो अति उत्तम अन्यथा किसी पवित्र नदी का जल ले या फिर घर का ही शुद्ध जल ले उसमे पूजा का सिंदूर मिला ले और पांच कोई भी फूल-गुड़हल+गुलाब-गेंदा+चमेली+कनेर या फिर जो आपको अपने आसपास सहज रूप से मिल जाये नही तो कोई एक ही रंग के फूल चढ़ाये। और प्रातः से साय तक अखंड घी या तिल के तेल का दीपक जलाये। और साय को चन्द्रमा के उदय और दर्शन करके उन्हें अपने यहाँ बनाई प्रसाद की खीर का कुछ भाग के छंटे या जरा सा एक दोने में रख भोग दे व् उन्हें जल चढ़ाये और नमन व् सिद्धासिद्ध महामंत्र का 21 बार जप कर नमन कर वापस आकर घर में जो बना हो व् भोजन और प्रसाद की खीर खाये व्रत का समापन करें।यही है सामान्य व्रत विधि।और जो जिस पूर्णिमा से व्रत प्रारम्भ करता है आगामी पुरे वर्ष की 12 पूर्णिमा के पूर्ण हो जाने पर उसी दिन उसका व्रत सम्पूर्ण होता है। तथा अपने घर में सिद्धासिद्ध महामंत्र से यज्ञ करके सत्य ॐ चालीसा का 7 या 11 या 21 पाठ करके किसी संत या भक्त या गरीब व्यक्ति को 11 या 21 सत्य ॐ चालीसा का वितरण,वस्त्र और दक्षिणा दान कर व्रत का उद्यापन पूर्ण करता है। उसकी इस जगत में जीते जी सभी मनोकामनाएं सम्पूर्ण होती है यह अनुभुत सत्य वचन है।

-और जो भक्त इन महावतार महाशक्ति पूर्णिमा का अपने घर, गांव,शहर या तीर्थ स्थान पर मन्दिर बनवाकर स्थापना करता है उसकी सात से चौदह पीढ़ियां सुखी धन और धान्य से परिपूर्ण होकर मुक्ति पाती है।।

-वैसे प्रत्येक चैत्र नवरात्रि के अंत में आने वाली महापूर्णिमा को इन्ही महादेवी के नाम से सभी विवाहित पुरुष अपनी प्रेम पत्नी के लिए चांदी के चन्द्र को सेब में लगा कर निराहार व्रत रखते है। जिसे साय चंद्र दर्शन के उपरांत पत्नी अपने मुख से सेव को काट भोग लगाकर पति की खाने को देती है। तथा दो सप्त रंगी धागों से बनी प्रेम डोर को एक दूसरे के हाथ में सम्पूर्ण समर्पण का प्रेम वचन देते हुए बांधते है व् खीर आदि प्रसाद के भोजन से व्रत का समापन करते है। जिसकी सम्पूर्ण व्रत विधि हमारे चैत्र नवरात्रि के उत्सव दिवस पर पढ़ सकते है। जो आगामी चैत्र को सम्पूर्ण देश विदेश में 5वीं बार मनाई जायेगी।जिसके फल से प्रत्येक परिवार में प्रेम और शांति और सन्तान आदि की प्राप्ति होकर सभी ग्रह दोष मिट जाते है।।
-अभी सभी विशेषकर स्त्री भक्त और सहयोगी पुरुष भक्त भी मिलकर 5वीं बार 23 नवम्बर 2018 को कार्तिक पूर्णिमा के पवन दिवस पर स्वतंत्र स्त्री महा कुम्भ स्नान करते हुए महावतार प्रेम पूर्णिमा महादेवी के सर्व रोग दोष संकट ग्रह और कालसर्प,पितृदोष आदि के निवारणार्थ गंगनहर बुलंदशहर पर विधिवत मंत्रयज्ञानुष्ठान पर्व मनाएंगी। आप सभी को भी उसमे सम्मलित होने का आमन्त्रण है।।

 

माँ पूर्णिमा देवी की मूर्ति की घर में स्थापना : –

 

माँ पूर्णिमा देवी की मूर्ति स्थापना से घर की दुख दरिद्री दूर होती है। घर में शांति आती है। बिगड़े कार्य सफ़लता में बदल जाते हैं। धन, यश, वैभव, शिक्षा आदि की समृद्धि आती है। जीवन सफ़लता की ओर अग्रसर हो जाता है।

इन नवरात्रि में माँ पूर्णिमा देवी की मूर्ति स्थापना कर सकते हैं। श्री सत्य सिद्ध आश्रम बुलंदशहर से माँ पूर्णिमा देवी की प्राण प्रतिष्ठित मूर्ति प्राप्त की जा सकती हैं। ये मूर्ति इतनी चमत्कारिक होती हैं कि घर की सारी दुख दरिद्रता दूर होने लग जाती है।

 

-सत्य ॐ सिद्धाश्रम से महावतार महादेवी सत्यई प्रेम पूर्णिमा की प्राणप्रतिष्ठित मूर्ति को माँगा कर अपने घर,गांव,शहर, तीर्थस्थान पर स्थापित कराये धर्म पूण्य लाभ कमाएं।

-सम्पर्क सूत्र- पुजारी श्री मोहित महंत जी-08923316611
और महंत श्री शिवकुमार जी-09058996822
सत्य ॐ सिद्धाश्रम शनिमन्दिर कोर्ट रोड बुलन्दशहर(उ.प्र.)

-प्राणप्रतिष्ठित देवी प्रतिमा जो शुद्ध पीतल और स्वर्ण पालिशयुक्त है. 9 इंच ऊँची और साढ़े तीन किलों वजन की है, तथा उनका श्री भग पीठ लगभग 9 इंच लंबा अनुपाती चौड़ाई व् ढेढ़ से दो किलों वजन का है।जिसकी दक्षिणा समयानुसार 25 सौ व् भेजने का खर्चा अलग से तक बनता है।।अभी महादेवी की कृपा हेतु सम्पर्क करें।।

 

माँ माँ है वे बहुमूल्य है- जो मांगेगा मिलेगा।।

!!जय पुर्णिमाँ महादेवी की जय!!

 

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श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येंद्र जी महाराज

जय सत्य ॐ सिद्धायै नमः

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