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हस्तरेखा विज्ञान (भाग-9), हाथ में तिल होने के क्या हैं फायदे? हाथ में कहां और किस स्थिति में तिल होते हैं लाभकारी, जानें श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येंद्र जी महाराज से

 

 

 

 

 

क्या आप जानते हैं हाथ में तिल आपका भाग्य बदल सकते हैं? हाथ में तिलों की स्थिति आपको मालामाल कर सकती है? श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येंद्र जी महाराज हस्तरेखा विज्ञान के नौवें भाग में आज आपको हाथ में तिल होने के फायदे बता रहे हैं।

 

 

कहते हैं तिल से सुंदरता बनती है। एक मामूली सा काला सा निशान कई बार अच्छा भी लगता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जो तिल आपको मामूली लगते हैं वो जिंदगी बदल सकते हैं। श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येंद्र जी महाराज आज हस्तरेखा विज्ञान के नौवें भाग में तिलों के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दे रहे हैं कि कैसे तिलों की स्थिति आपके लिए लाभकारी साबित हो सकती?

 

 

हस्तरेखा विज्ञान (भाग-8): राहु पर्वत यानि राहु क्षेत्र से जाने जीवन के छिपे गहरे राज, हाथ मे राहु पर्वत कैसे डालता है अपना प्रभाव, बता रहे हैं श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येंद्र जी महाराज

 

 

हाथ में तिलों का शरीर के किस स्थान पर होने से,शरीर के अन्य किस भाग पर तिल और उसका फल कैसा होगा,इस चमत्कार को और व्यक्ति को क्या लाभ हानि मिलती है,उस के विषय में इतने विराट विषय को संछिप्त अर्थ में स्वामी सत्येंद्र सत्यसाहिब जी बता रहे है की:-
आओ पहले हथेली में तिल का फल जाने:-

 

1-जीवन रेखा से निकली शुक्र रेखा पर तिल होने से व्यक्ति सदा अपने अतीत की बातों को,किये गए कोई गुप्त सम्बन्ध आदि को लेकर हीन भावना से ग्रस्त और दब्बू स्वभाव तथा डरपोक होता है।
2-भाग्य रेखा पर मस्तक रेखा से कुछ नीचे तिल-शुभ रहता है और परिवारिक जीवन में सुखी और धन की स्थिति बहुत अच्छी रहती है।
3-जीवन रेखा के अंत में शुक्र पर्वत की और हो तो,व्यक्ति सदा जीवन साथी और विपरीत लिंगी के कारण तनाव में बना रहता है।
4-बुध पर्वत पर और वहीं ह्रदय रेखा पर तिल-व्यक्ति के वैवाहिक जीवन में सुख कम दुःख ज्यादा बने रहते है।
5-सूर्य रेखा पर बीच में या ऊपर की और तिल,धन का सदा नुकसान उसे छोटे लोगो या बाहर के बच्चों से चोरी से होता है और दिया पैसा लगभग कभी वापस नहीं आता।
6-अंगूठे के पहले पोर पर तिल-बहुत परिश्रम और अच्छी योजना से ही धन आता है,उसे भाग्य से नहीं मिलता है।
7-अंगूठे के तीसरे पर्व के नीचे,शुक्र पर्वत के किनारे पर तिल हो-तो व्यक्ति के सन्तान होने पर ही भाग्य उदय होता है।और विशेषकर पुत्र के होने पर।
8-अंगूठे के तीसरे पोर पर या उससे कुछ नीचे तिल होने से-व्यक्ति की पहली सन्तान की जन्म के बाद शीघ्र ही मृत्यु होती है।
9-कनिष्ठा ऊँगली के निचले पोर पर तिल-व्यक्ति के घर से जेवर या कीमती वस्तु चोरी होती है।
10-तर्जनी ऊँगली के अंतिम पोर पर तिल होने से-प्रसाशन से सदा न्याय या उसमे अधिकार मिलता है और जीवन सफल रहता है।
11-मध्यमा के अंतिम पोर पर तिल-व्यक्ति की सदा प्रगति होती है और स्थिति विपरीत होने पर वो मस्त रहता है।
12-अनामिका ऊँगली के अंतिम पोर पर तिल-व्यक्ति को ह्रदय में दर्द और ब्लड प्रेशर आदि से कष्ट बना ही रहता है।
13-कनिष्ठा ऊँगली के अंतिम पोर पर तिल-व्यक्ति को सदा सन्तान से और जमीन के कार्यों से धन हानि और लाभ नहीं मिलता है।
14-जीवन रेखा के मध्य से नीचे और शुक्र पर्वत की और या बाहर की और भी तिल हो तो-व्यक्ति को पार्टनरशिप में और विशेषकर विपरीतलिंगी के संग किया कार्य में धन का नाश होता है।
15-ह्रदय रेखा से नीचे और गुरु पर्वत की और तिल-व्यक्ति को अपने कार्य और गुणों से धर्म और न्यायिक क्षेत्र में प्रसिद्धि और पद यश मिलता है।
16-वहीं मस्तक रेखा से ऊपर या निकट तिल हो-तो व्यक्ति को अपने परिश्रम के बहुत करने पर कम लाभ मिलेगा और ये लाल तिल हो तो,सिर में बड़ी भारी चोट लगे।
17-चन्द्र पर्वत पर तिल हो तो-व्यक्ति अपने जन्म या वर्तमान स्थान से और विचार में नए परिवर्तन से धन और प्रतिष्ठा कमा पाता है और सफेद तिल हो तो-उसके विचार और योजना को बता देने से देरी हो,नहीं बताये तो सम्पूर्ण और शीघ्र लाभ पाये।
18- मणिबंध की और तिल हो तो-व्यक्ति सफलता को धीरे धीरे उन्नति करता हुआ अवश्य पाता है और उसे कोई भी सौदा हो,उसे एक बार में ही करने पर अच्छा धन मिलता है।यानि रुक कर नहीं करें।
19-तर्जनी ऊँगली के दूसरे पोर पर तिल-व्यक्ति सदा अपने अधीन लोगो को उनके काम देर से करके या अनावश्यक ही परेशान करता है।और अनैतिक सम्बंधों में और ऐसे ही विषयों में धन खर्च करता है।
20- ये तिल किसी भी ऊँगली के बीच के सन्धि स्थान में होने से, व्यक्ति के घर में घर का ही व्यक्ति चोरी करेगा और उस स्थान से कुछ नीचे होने पर बाहर का व्यक्ति चोरी करता है।
21-मध्यमा ऊँगली के दूसरे पर्व पर तिल हो,ऐसा व्यक्ति कलही होता है और यहीं स्थान पर दोनों उँगलियों में नक्षत्र होने से हत्यारा होता है।
22-चन्द्र से उठती भाग्य रेखा के कुछ ऊपर उठने पर तिल हो तो,व्यक्ति को अपनी उन्नति के लिए अपना घर और शहर या जिला यहां तक प्रदेश भी छोड़ना पड़ता है और उसे तभी उन्नति मिलती भी है।
23-मस्तक रेखा के अंत में या उसी और हथेली के बाहर की और तिल हो तो,व्यक्ति को कितना ही पौष्टिक खाना खा ले या महनत कर ले,वो शरीर और धन आदि से उन्नति नहीं पाता है।
24- मस्तक रेखा के नीचे और भाग्य रेखा के दूसरी और केतु पर्वत पर तिल-व्यक्ति को कान में कष्ट या बहरापन का रोग देता है।
25-अनामिका ऊँगली के दूसरे पोर यानि भाग पर तिल हो तो,व्यक्ति विपरीत लिंगियों के चक्कर में फंस कर धन और पद प्रतिष्ठा का नाश करता है।
26-अनामिका ऊँगली यानि सूर्य ऊँगली के नीचे वाले पोर के अंत में नीचे को तिल हो तो,व्यक्ति को विशेषकर विदेशी और विदेश में या दूसरी जाति के लोगों से धोखा मिलता और धन पद नाश होता है।
27-कनिष्ठा ऊँगली के बीच के पोर पर तिल हो तो-व्यक्ति को उसके सुसरालिया और व्यापार में साझेदार लोग ही धोखा देते है।
28-बीच की शनि ऊँगली के निचले पोर पर तिल हो तो-व्यक्ति या उसके घर का मालिक या उसका वारिस ही चोरी या घर में छोटे से बडे स्तर तक का अपराध करता है।
29-गुरु पर्वत पर तिल हो तो-व्यक्ति के विवाह या मांगलिक कार्य में अचानक बाँधा आती है और सन्तान सुख में देरी होती है और धर्म उपासना या साधना या मंत्र सिद्धि में सफलता नहीं या बहुत ही देर से मिलती है।
30-शनि पर्वत के नीचे और ह्रदय रेखा के ऊपर तिल हो तो-व्यक्ति इश्क बाजी में पड़ता है और सफेद तिल हो तो-इश्क में धोखा देता और पाता भी है और स्त्री के ये तिल प्रेम सम्बन्धों में धोखे ही मिलते है और बदनाम होती है।
31-मस्तक रेखा और ह्रदय रेखा के बीच में भाग्य रेखा के पास तिल हो तो-व्यक्ति को इस आयु पर 26 या 36 या फिर केवल 53 से 58 तक आयु में ही पद और प्रतिष्ठा की भारी प्राप्ति होती है।
32-स्वस्थ रेखा या मस्तक रेखा के अंत में मंगल पर्वत पर रेखा पर तिल हो तो- व्यक्ति का शरीर सदा किसी न किसी रोग से ग्रस्त बना रहकर कमजोर रहता है।
शरीर में तिल-
1-गले पर तिल-भक्ति प्रधान व्यक्ति होता है।
2-बाह में कहीं भी तिल-धनी बनता है।
3-जांघ में तिल-रसिक होता है।
4-होटों पे तिल-लोभी आदत का होता है।
5-हथेली पे-निरन्तर धन और धान्य और प्रगति को प्राप्त करता है।
6-नेत्र में तिल-प्रेम सम्बंधों के निरन्तर बनते रहने से और जीवन साथी से सदा दुःख पाता है।
7-पीठ और कमर और नितम्ब या गुप्त स्थान पर तिल-काल्पनिक प्रेम और काम समबन्धों में विचारने से व्यर्थ ही ऊर्जा क्षय करता है।
8-माथे की रेखा पर या माथे पर कहीं भी तिल-सदा अनावश्यक और चिंता युक्त विचारों से भरा रहता है और संदेही होता है।

(तिल का चमत्कार)

शरीर के बाहरी भाग पर तिल को देख कर आप बता सकते है की-व्यक्ति के ढके हुए शरीर के किस भाग पर कहाँ तिल होगा और व्यक्ति चमत्कृत हो जाता है।साधू इसी से लूटते है।यो इस विषय में कुछ तिलों और उनका उत्तर तिल कहाँ होगा,आओ बताता हूँ-

9-माथे पर दाहिनी और तिल हो तो-व्यक्ति के पेट या भुजा पर दाहिनी और ही तिल होता है-जीवनसाथी सुखी रहता है।
दाहनी भुकटि पे तिल हो तो-छाती के दाहिनी और ही तिल होता है-उसे सदा यात्रा से लाभ हो।
भुकटियों के बीच में तिल हो-उसके पेट के बीच तिल होता है-व्यर्थ के तर्क करने वाला और अहंकारी होता है।
नाक पर तिल हो तो-उसकी नाभि में तिल होता है-ऐसे व्यक्ति के जीवनसाथी के बीच बड़ा स्नेह और प्रेम होता है।
कनपटी पे तिल हो-तो बगल में तिल होता है-व्यक्ति कठिन परिस्तिथि में भी सदा प्रसन्न रहता है।और यदि ये तिल उलटी कांख में हो तो,व्यक्ति को असाध्य रोग होता है।
नाक के निकट होठ पे तिल-पेट के नीचे या गुदा पर तिल होता है-पुरुष या स्त्री की अल्पायु होती है।किसी कारण से आत्महत्या की स्थिति बनती है।
गाल पर तिल हो तो-कूल्हे पर तिल होता है-जीवन सामान्य रहता है।
होंठ के नीचे हो तो-घुटने पर तिल होता है-जीवन सादगी में गुजरता है।
ठुड्डी पर तिल हो तो-पुट्ठे पर तिल होता है-शुभ और प्रेमिक जीवन रहता है।

 

“इस लेख को अधिक से अधिक अपने मित्रों, रिश्तेदारों और शुभचिंतकों को भेजें, पूण्य के भागीदार बनें।”

 

अगर आप अपने जीवन में कोई कमी महसूस कर रहे हैं? घर में सुख-शांति नहीं मिल रही है? वैवाहिक जीवन में उथल-पुथल मची हुई है? पढ़ाई में ध्यान नहीं लग रहा है? कोई आपके ऊपर तंत्र मंत्र कर रहा है? आपका परिवार खुश नहीं है? धन व्यर्थ के कार्यों में खर्च हो रहा है? घर में बीमारी का वास हो रहा है? पूजा पाठ में मन नहीं लग रहा है?
अगर आप इस तरह की कोई भी समस्या अपने जीवन में महसूस कर रहे हैं तो एक बार श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज के पास जाएं और आपकी समस्या क्षण भर में खत्म हो जाएगी।
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श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज

जय सत्य ॐ सिद्धायै नमः

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