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Home / Bihar / बिहार के मुजफ्फरपुर में सरकार से अनुदान पाए आश्रयगृह में बच्चियों के साथ रेप और हत्या के मामले में सप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप: इस ख़बर पर पढ़ें ख़बर 24 एक्सप्रेस की खास रिपोर्ट

बिहार के मुजफ्फरपुर में सरकार से अनुदान पाए आश्रयगृह में बच्चियों के साथ रेप और हत्या के मामले में सप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप: इस ख़बर पर पढ़ें ख़बर 24 एक्सप्रेस की खास रिपोर्ट

 

 

बिहार के मुजफ्फरपुर के आश्रयगृह में समाज को शर्मसार कर देने वाले, दिल दहला देने वाले कांड ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। लोगों में बिहार सरकार के प्रति गुस्सा है तो वहीं आरोपियों को फांसी की सजा की मांग की जा रही है।

 

 

बता दें कि बिहार के मुजफ्फरपुर जिला बालिका गृह में बच्चियों के साथ जिस तरह का व्यवहार हुआ उसे सुनकर किसी के भी रोंगटे खड़े हो जाएं। बच्चियों की उम्र महज़ 7 साल से 14 साल और इनके साथ जिस तरह का दुर्व्यवहार हुआ उसे सुनकर हर कोई आरोपियों की फांसी की मांग कर रहा है।
बच्चियों के मुताबिक वो चाहे 7 साल की हो या 14 साल की सभी के साथ रेप होता था और अगर विरोध किया जाता तो उसे तब तक भूँखा रखा जाता और मारा पीटा जाता जबतक कि वो ऐसा करने के लिए अपनी सहमति न जता दे, और जबतक उनके साथ बलात्कार नहीं हो जाता था तब तक उन्हें खाना नहीं दिया जाता था। बच्चियां जिस कदर डरी सहमी हुई थीं उन्हें देखकर अंदाज लगाया जा सकता था कि उनके साथ किस तरह से हैवानियत की सारी हदें पार की गई होंगी।

 

 

आरोपी बृजेश ठाकुर नाबालिक बच्चियों को अधिकारियों और बढ़ें नेताओं को भी परोसता था। जिसकी वजह से उस पर मेहरबानी बनी रही।

 

 

इस घिनौने अपराध में अबतक 29 बच्चियों के साथ रेप की पुष्टि हो चुकी है। ख़ास बात ये है कि यहां रहने वाली बच्चियों ने अपनी साथी की हत्या होने का भी आरोप लगाया था।

 

बता दें कि मुज़फ्फरपुर में एक और शेल्टर होम का विवाद सामने आया है। शेल्टर होम से 11 महिलाएं और 4 बच्चे ग़ायब हैं। आरोप है कि 52 दिनों तक मामले को दबाया गया। एफआईआर दर्ज करने की अनुमति लेने का बहाना बनाकर वक्त बर्बाद किया गया। ये शेल्टर होम भी ब्रजेश ठाकुर के ही एनजीओ द्वारा चलाया जा रहा था। बृजेश ठाकुर के गैर सरकारी संगठन द्वारा संचालित एक स्वयं सहायता समूह के परिसर से 11 महिलाओं के लापता होने के बाद ठाकुर के खिलाफ एक और एफआईआर दर्ज की गई है।

अब सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए गुरुवार को इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के आश्रय गृह में नाबालिग दुष्कर्म पीडि़ताओं की तस्वीरों व वीडियो प्रसारित करने पर रोक लगा दी है।

न्यायमूर्ति मदन बी.लोकुर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने एक शख्स द्वारा अदालत को पत्र लिखने के बाद इस घटना पर स्वत: संज्ञान लिया। इस पर न्यायालय ने महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, बिहार सरकार से जवाब मांगा है।
अदालत ने टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (टीआईएसएस) से भी सहायता मांगी है। पीठ ने प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया द्वारा नाबालिग दुष्कर्म पीडि़ताओं की पहचान उजागर करने पर चिंता जताई। अदालत ने (मॉर्फ) तस्वीर भी प्रकाशित नहीं करने की बात कही है।

मुजफ्फरपुर आश्रय गृह मामला इस साल की शुरुआत में प्रकाश में आया था, जब बिहार समाज कल्याण विभाग ने टीआईएसएस द्वारा किए गए सोशल ऑडिट के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की। उल्लेख है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सिफारिश के बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो ने रविवार को आश्रय गृह दुष्कर्म मामले की जांच संभाल ली।

 

 

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मनीष कुमार

ख़बर 24 एक्सप्रेस

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