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जन्मकुंडली के 12 कालसर्प दोष, जिंदगी के अद्भुत रहस्य (भाग 4), संघर्ष को सफलता में बदलने का मंत्र, बता रहे हैं श्री सत्यसाहिब स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज

 

 

 

 

कालसर्प दोष और जन्मकुंडली के रहस्य जिनसे स्वामी सत्येन्द्र जी महाराज पर्दा उठा रहे हैं। इन मंत्रों को पढ़ने के बाद अगर आपने इन्हें अपने जीवन में उतार लिया तो यकीन मानिए आपका संघर्ष सफलता में बदल सुख की और अग्रसर हो जाएगा।

 

भाग – 4

जन्मकुंडली में कालसर्प दोष पर जो भी अंधकारमय ज्ञान में जी रहे हैं वे इस लेख को पढ़ें और अपने जीवन में उजाला भरें। जन्मकुंडली में 12 कालसर्प दोष के अद्भुत रहस्यों को जानिये और अपने जीवन से अंधकार को दूर भगाइये।

जन्मकुंडली के 12 कालसर्प दोष के अद्धभुत चमत्कारिक वो निदान उपाय जो अपने पहले कभी न सुने न पढ़े और न जाने होंगे-जिनके करने मात्र से आपका संघर्ष भरा जीवन सुख और आनन्द से भर जायेगा:-

( भाग–4)

*दसवें घर का-घातक कालसर्प दोष के कारण और उपाय:-*
इस योग में तुम्हारे द्धारा अथवा पिता या सुसर द्धारा किये गए इस दोष के कारण ही परस्पर में विवाद रहने और घर और सम्पत्ति के छीनने या कम मिलने और सरकारी सर्विस या प्राइवेट सर्विस या कार्य तथा राज्य सम्मान व् पद प्रतिष्ठा में कमी या अचानक से ये सब मिलते हुए छूट जाने आदि के योग बनते है-
यो ये कारण है:-

*-1-सड़क के किनारे खड़े होकर दूर दिख रहे पीर की मजार की और देखते हुए ये समझ कर की-अरे ये तो दूर है यो जानते हुए भी पेशाब करने से अथवा पास में पीपल या सेमल या बड़ का पेड़ हो वहाँ पेशाब करने से ये दोष बनता है।

*-2- किसी मंदिर के पिछवाड़े जाकर शौच या पेशाब करने से ये दोष बनता है।

*-3-आंके के पोधे के करीब पेशाब करने से ये दोष बनता है।

*-4-सांप की बॉबी तोड़ने से ये दोष बनता है।

*-5- बहुत पुराने खंडर में यदि पिलखन के पेड़ के नीचे इच्छाधारी सर्प का निवास होने के पता लगने पर वहां जाकर उसे वशीभूत करने की साधना को बीच में ही छोड़ने से ये सर्पदोष बनता है।

*-6-श्मशान साधना करने के समय अथवा पीर की साधना करने के समय बार बार एक सर्प फन फैलाये दिखाई देते रहने से साधना की बीच में छोड़ने से ये अधूरी सिद्धि का सर्प दोष बनता है।

*-7-अपने घर की छत्त पर अपने पितरो की स्थापना करने और उन पर बच्चों या किसी के द्धारा कुछ गन्दा फेंकने और तुम्हारे से सही सफाई नहीं होने से भी ये दोष बनता है।

*-यो ये और ऐसा बिलकुल भी नहीं करें।और ऐसा दोष होने पर क्या करें:-

*-किसी भी मन्दिर में जाकर प्रत्येक माह में पड़ने वाली अपने जन्मदिन की तारीख को तो अवश्य ही वहां झाड़ू-पोछा धुलाई से या सबके साथ मिलकर सफाई करें।या आपके पिता जी जीवित है,तो प्रत्येक माह में पड़ने वाली उनके जन्मदिन की तारीख पर ऐसा करें,तो मन्दिर के पीछे या साइड में किये गए दोष का धीरे धीरे समाधान मिलकर परस्पर शांति मिलेगी और आपके कार्य सिद्ध होंगे।

*-अपने घर में बुधवार को सफेद आंके का पौधा लगा कर उस पर बुधवार को साय के समय या प्रातः स्नान करके 4 बजे चमेली के तेल का दीपक जलाया करें।तो अति शीघ्र धन सम्पत्ति का बन्धन खुल कर लक्ष्मी की प्राप्ति होगी।

*-दो चांदी के सांप बनवाकर,ध्यान रहे की-उन दोनों सर्पो की शुद्ध चांदी से बना, बिना गिलट धातु मिलाये बनवाये,नाकि पहले से बना बनाया हुआ ले आये और स्मरण व् विशेष ध्यान रहे की- उन सर्पों की ऑंखें बड़ी ओर खुली सी दिखाई देनी चाहिए,ये बात यहां मुख्य और तन्त्र प्रधान ज्ञान है,तभी ये उपाय प्रभावी होगा अन्यथा नहीं होगा, अब ऐसा बनवाकर ले आये और इतने यदि अमावस्या या पूर्णिमा नहीं आई है,तबतक उसे अपने पूजाघर में एक प्लेट में गंगा जल में थोडा सा डुबोकर रखा रहने दे और आगे
उसे अमावस्या और पूर्णिमा के दिन प्रातः अँधेरी ही मन्दिर में जाकर पंचाम्रत से अपना गुरु मन्त्र अथवा अपना जो भी इष्ट मन्त्र हो उससे अपने इष्ट या शिवलिंग पर चढ़ाते हुए अपने इस अज्ञात दोष के प्रति छमा याचना करते सर्प जोड़ा चढ़ाये और थोड़ी देर वहीं बैठ कर प्रार्थना जप स्त्रोत्र ध्यान आदि करके उस सर्प के जोड़े को इष्ट के आगे माथा लगा कर अपने घर ले आवे और उसे अपने घर की चौखट या मुख्य दरवाजे के एक एक करके दोनों और इस प्रकार से लगाये की-दोनों का मुख एक दूसरे की और हो।बस आपको शांति की प्राप्ति होगी।अब इन चोखट पे लगे सर्पों को प्रति अमावस और पूर्णिमा के दिन प्रातः या साय उन सर्पों को जप करते हुए धुप दीप अवश्य दिखाया करें,तब चमत्कार देखना।

*-श्मशान में की साधना के इस दोष के लिए-जिससे भुत प्रेतों पितरों के दर्शन होते रहने आदि की समस्या निवारण की-यदि आपको स्मरण भी नहीं है की-मेने कब ऐसा साधनगत दोष किया तो-अपने शहर के श्मशान में किसी भी होली दीपावली या ग्रहण के समय अथवा ऐसा नहीं हो पाये तो शनिवार के दिन अपने साथ पंचाम्रत और कलावा लॉकर वहां जाये और-श्मशान के अंदर की और जो पहला वृक्ष हो यदि ऐसा अंदर नहीं हो तो जो बाहर ही हो, उस के पास खड़े होकर उसे नमन करते हुए अपने अज्ञात या ज्ञात दोष के लिए क्षमा मांगे और तब उस पर 7 उलटे चक्कर लगते हुए 7 बार कलावा लपेटे और गुरु या इष्ट मंत्र जपते रहे तब क्लावें की अंतिम सातवीं गांठ मारकर वहां अपने साथ लाये पंचाम्रत को चढ़ा दे और नमन करके पीछे देखे बिना चले आये।ऐसा एक वर्ष में छः माह के अंतराल से दो बार करें, तो आपको चमत्कारिक परिणाम मिलेंगे और अधूरी सिद्धि के भी द्धार खुल जायेंगे।

*-यदि स्वप्न में या घर में अचानक आते जाते किसी सफेद दाढ़ी वाले हरे कपड़े पहने या काले कपड़े पहने या ऐसी छाया के व्यक्ति दिखें या अहसास हो या अचानक झटके से आँख खुले या कोई पकड़े या धक्का सा दे-तो ये पक्का पीर का दोष है।
-यो इस दोष निवारण के लिए अपने जहां ऐसा अनुष्ठान या साधना की है,वहाँ ये उपाय करें अथवा जिन्हें ऐसा पता नहीं,पर जिन्हें अपने पूर्वजन्म के किये इसी दोष के कारण ये अनुभव होते है उन्हें अपने गांव या शहर में या पास के किसी प्रसिद्ध पीर से ये उपाय प्रारम्भ करने होंगे-यदि एक बार में समाधान हो जाये तो उत्तम,अन्यथा यदि आपके निकट के क्षेत्र में दो या अधिक पीर के पूज्य स्थान है,तो उन सभी पीरों पर धुप अगरबत्ती और प्रसाद ले जाकर पहले उनकी मजार के पास की सफाई करें और फिर धूपबत्ती अगरबत्ती जलाकर अपने किये की क्षमा मांगते हुए बताशे या लाया प्रसाद चढ़ाये।और एक चक्कर लगाकर उनके पैरों में माथा लगा कर नमन करें और चले आये।यदि वहां ज्यादा स्थान हो तो वहां के बाबा से पूछकर पौधा लगाये और कोई सेवा-जेसे-उर्स,पुताई रँगाई आदि में भी यथायोग्य सहायता भी करें।तो जानो-वहीं दिखने वाले पीर या छाया आपके लिए शुभ बनकर आपकी सदा साहयता और कल्याण करेगी,जो की आपने सोचा भी नहीं होगा।

*- घर के ऊपर रखे पितरों की पहले तो सफाई आदि सही से करें,यदि फिर भी लाभ नहीं हो रहा है,तो किसी पण्डित से किसी शुभ अमावस या पूर्णमासी के दिन को उन सबको वहां से सश्रद्धा उठाकर गंगा जी पर स्थापना अथवा उन्हें गंगा जी में प्रवाहित कर आएं।तो शीघ्र कल्याण होगा।ऐसी पितृ स्थापना के स्थान पर आपको सदा श्राद्धों में उनके नाम से किसी भी मन्दिर आदि स्थान पर, जो बने भंडारा ही करना सबसे उत्तम उपाय होता है।

*-विशेष ज्ञान:-*

जो लोग ये विचार करते है की-हमने तो गया या काशी या किसी तीर्थ पर जाकर बढियां तरहां से यज्ञानुष्ठान आदि करके पितरों का पिंडदान या नारायण बलि आदि करा दिया है,और अब हमें ये सब नहीं करना है,तो वे बड़ी भारी भूल करते है।क्योकि अब वो जमाने नहीं है की-जब कर्मकांडी पण्डित आदि बड़े शुद्धाचरण और सिद्ध हुआ करते थे और उनके द्धारा किये अनुष्ठानों से पूर्व ऋषियों की भांति जप तप से आपके पूर्वज अपने लोक जाते हुए आपको आशीर्वाद देते थे।यो अब सब केवल कर्मकांड ही बचा है,उसकी सिद्धि नहीं..यो ही यहाँ बताया जा रहा है की-इन आपके ये किये पिण्डदानों आदि के उपायों के उपरांत भी आपके पितरों को शांति और अपना लोक परलोक की प्राप्ति नहीं होती है,बल्कि वे त्रिशंकु बनकर बीच में ही लटक जाते है,यो इन सब अनुष्ठानों के उपरांत सदा अपने पितरों के श्राद्धों में या उनके ज्ञात जन्मदिन या मृत्युदिन पर अवश्य ये भंडारा करने से ही सच्ची पितृ दोष की शांति और सम्पूर्ण लाभ मिलेगा।यो ऐसा अवश्य करें।

 

शेष -आपकी जन्मकुंडली के ग्यारहवें घर यानि समस्त आय लाभ के या लक्ष्मी बन्धन आदि के दोष के शेषनाग कालसर्प दोष के निदान का अचूक उपाय भाग-5 में बताएंगे.,

क्रमशः

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श्री सत्यसाहिब स्वामी
सत्येन्द्र जी महाराज

जय सत्य ॐ सिद्धायै नमः

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