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जेएनयू के छात्रों और शिक्षकों पर दिल्ली पुलिस की लाठी, किसके कहने पर हुआ यह बर्ताव? क्या यह अघोषित आपातकाल है? देखें वीडियो

 

Delhi Police lathi charge on JNU students and teachers protesting for their demands, Is this an undeclared emergency? See video, khabar 24 Express

 

 

 

“जेएनयू के छात्रों और शिक्षकों को विरोध मार्च कुछ ज्यादा भारी पड़ गया। उनके इस विरोध मार्च पर दिल्ली पुलिस ने अपनी जमकर भड़ास निकाली।”

 

 

 

बता दें कि जेएनयू के छात्र और शिक्षक अपनी मांगों को लेकर “सेव जेएनयू” मार्च कर रहे थे। लेकिन छात्रों और शिक्षक असोसिएशन (JNUTA) को दिल्ली पुलिस ने बीच में ही रोक लिया। जेएनयू के छात्र और टीचर्स यौन उत्पीड़न, क्लास में अनिवार्य उपस्थिति और स्वायत्ता जैसे कई मामलों को लेकर कैंपस से संसद तक विरोध मार्च निकाल रहे थे। मार्च शांति से चल रहा था। छात्र नारेबाजी करते हुए आगे बढ़ रहे थे और साथ ही मीडियाकर्मी उन छात्रों को कवर कर रहे थे कि इसी दौरान दिल्ली पुलिस बिफर गयी। ऊपर दिए वीडियो में देख सकते हैं कि किस तरह से वो छात्रों के साथ व्यवहार कर रही है। आप इस वीडियो को देखें और अंदाज लगायें कि जो हो रहा है क्या वो सही है?

 

बता दें कि छात्रों के साथ हुई झड़प में पुलिस ने वॉटर कैनन और लाठीचार्ज करते हुए कई छात्रों को हिरासत में भी ले लिया। प्रदर्शनकारी जेएनयू के प्रफेसर अतुल जौहरी को बर्खास्त करने की भी मांग कर रहे थे। उन्हें साउथ दिल्ली के संजय झील पर रोका गया। यह पदयात्रा जेएनयू छात्र और टीचर्स ने साथ मिलकर बनाई थी। बता दें कि (JNUTA) ने इससे पहले कैंपस के अंदर ही तीन-दिन का ‘सत्याग्रह’ प्रोग्राम का आयोजन किया था।

 

जेएनयू की एक प्रोफेसर ने अपने फेसबुक पोस्ट में दिल्ली पुलिस के अमानवीय बर्ताव के बारे में लिखा। उन्होंने अपने फेसबुक पर वीडियो शेयर करके लिखा कि “हमारे शांतिपूर्ण पैदल मार्च पर लाठीचार्ज करने के लिए दिल्ली पुलिस को शर्म आनी चाहिए। आठ छात्राओं के बाल खींचकर उन्हें न सिर्फ घसीटा गया बल्कि उनके कपड़े तक फाड़ डाले और उन्हें हिरासत में ले लिया गया है।”

 

आखिर मामला है क्या पहले यह जानिए :

 

जेएनयू शिक्षक संघ के बैनर तले ये शिक्षक उच्च शिक्षा में पीछे के दरवाज़े से निजीकरण का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार के इस फैसले से उच्च शिक्षा महंगी हो जायेगी और गरीब तथा सामान्य वर्ग के बच्चों के लिए दाखिला मुश्किल हो जायेगा।
शिक्षक संघ के उपाध्यक्ष देवेन्द्र चौबे और सचिव सुधीर कुमार ने यूनीवार्ता को बताया कि पुलिस ने जब उन्हें रोक दिया तो छात्रों ने वहीं धरना देना शुरू कर दिया लेकिन शिक्षक एवं पदाधिकारी संसद मार्ग पहुँच गए जहाँ पुलिस ने उन्हें फिर रोक लिया।
उन्होंने बताया कि मोदी सरकार शिक्षा का बज़ट को बढ़ा नहीं रही लेकिन स्वायतत्ता की आड़ में जेएनयू, बीएचयू , हैदराबाद विश्विद्यालय तथा अलीगढ़ मुस्लिम विश्विद्यालयओं को निजीकरण के लिए खोल रही है जो बहुत ही घातक कदम है। इसलिए हम इस मार्च को निकलने पर मजबूर हुए।

 

 

 

“बड़े पैमाने पर छात्र और शिक्षकों को पुलिस ने संजय पार्क में घेरकर रखा हुआ है।”

 

 

 

आपको जानकर शायद हैरानी हो कि छात्राओं के अलावा दिल्ली पुलिस ने पत्रकारों को भी नही बख्सा यहां तक कि महिला पत्रकार के साथ भी मारपीट व बदसलूकी की।
एक महिला पत्रकार ने आरोप लगाया कि वर्दी वाले एक व्यक्ति ने उसे ‘‘पकड़ा’’ और वहां से जाने को कहा। महिला पत्रकार ने बताया कि ऐसा करने वाला दिल्ली पुलिस में निरीक्षक है। विश्वविद्यालय परिसर से शुरु हुई इस ‘पदयात्र’ का आयोजन जवाहरलाल नेहरु छात्र संर्घ जेएनयूएसयूी और जवाहरलाल नेहरु यूनिवर्सिटी शिक्षक संर्घ जेएनयूटीएी ने किया। पत्रकार ने इस बाबत पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत सरोजनी नगर थाने में दर्ज करायी गयी है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि वे मामले पर गौर कर रहे हैं और वीडियो फुटेज को खंगालेंगे। पुलिस का सतर्कता विभाग मामले की जांच करेगा।

वही जिस तरह आज दिल्ली पुलिस का चेहरा सामने आया है उसे देखकर लग रहा है कि यहां पर अघोषित आपातकाल लगा हुआ है। दिल्ली पुलिस के क्रिया कलापों के देखकर भी लग रहा है कि वह किसी के इशारों पर काम कर रही है वरना छात्रों और शिक्षकों पर इस तरह का अमानवीय व्यवहार न करती। दिल्ली पुलिस अब सवालों के घेरे में है और ऐसे में दिल्ली के एलजी या गृहमंत्री को इसका जबाव देना ही होगा।

 

 

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माही गुप्ता

ख़बर 24 एक्सप्रेस

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