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मेट्रो के किराये को लेकर दिल्ली सरकार और केंद्र में फिर ठनी, केजरीवाल ने कहा हम मेट्रो का अधिग्रहण करने को तैयार

 

बढे मेट्रो किराये को लेकर दिल्ली सरकार और केंद्र के बीच एक बार फिर से ठन गयी है। केजरीवाल ने कहा कि वो किसी भी कीमत पर दिल्ली मेट्रो का किराया नहीं बढ़ने देंगे। अगर मेट्रो को इससे घाटा होता है तो दिल्ली सरकार उसको पूरा करने के लिए तैयार है और साथ ही दिल्ली सरकार मेट्रो का अधिग्रहण करने में भी पूरी तरह सक्षम है।
मेट्रो किराया बढ़ोतरी को लेकर केंद्र व दिल्ली सरकार के बीच तल्खी बढ़ती जा रही है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने रविवार को केंद्रीय शहरी विकास मंत्री हरदीप सिंह पुरी को पत्र लिखकर कहा है कि अगर केंद्र हामी भरे तो वह जनहित में दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन का अधिग्रहण करने को तैयार हैं। दिल्ली सरकार अपने हिस्से का 1500 करोड़ देगी पर पांच माह में दोबारा किराया बढ़ोतरी के पक्ष में नहीं है।
आपको बता दें कि दिल्ली मेट्रो का किराया इस साल दूसरी बार बढ़ रहा है। पहले ही दिल्ली मेट्रो के किराये में 10 फीसदी की वृद्धि हुई थी और अब दोबारा किराया बढ़ाये जाने का प्रस्ताव है। केजरीवाल ने दलील दी कि दिल्ली मेट्रो में किराये बढ़ाये जाने से लोग मेट्रो का कम इस्तेमाल कर रहे हैं उन्होंने कहा का कि दिल्ली में एक बार फिर से पब्लिक ट्रांसपोर्ट में इज़ाफ़ा हो जायेगा।

इसके अलावा केजरीवाल ने पुरी के पत्र में लिखे उस आंकड़े पर सवाल उठाए हैं जिसमें बताया गया था कि किराया 91 फीसदी तक बढ़ा है। केजरीवाल ने किराये के सभी स्लैब का जिक्र करते हुए कहा कि अधिकतम किराया 117 फीसदी तक बढ़ा है। आपका सुझाव है कि किराया घटाने पर दिल्ली सरकार को 3000 करोड़ रुपये की भरपाई करनी होगी। दिल्ली सरकार इसके लिए तैयार है। अगर कोलकाता मेट्रो 100 फीसदी भरपाई कर सकती है तो दिल्ली सरकार अपने हिस्से का 1500 करोड़ रुपये देने के लिए तैयार है। क्योंकि दिल्ली मेट्रो में केंद्र और दिल्ली सरकार 50-50 फीसदी की भागीदार है।
केजरीवाल ने आगे लिखा है कि मैं इससे बिल्कुल सहमत नहीं हूं कि केंद्र डीएमआरसी की धारा 86 के तहत निर्देश जारी नहीं कर सकती है। इस धारा के मुताबिक, अगर मेट्रो रेलवे प्रशासन कुछ गड़बड़ कर रहा है तो केंद्र सरकार के पास उसमें हस्तक्षेप करने और जवाब-तलब करने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि जब खुद डीएमआरसी को एफएफसी (किराया निर्धारण समिति) की सिफारिशें आठ सितंबर 2016 को मिल गई थी तो उसे लागू करने में आठ महीने की देरी क्यों की। अगर वह ऐसा कर सकती है तो फिर किराया बढ़ाने में एक साल का अंतर क्यों नहीं दे सकती है।
उन्होंने अंत में लिखा है कि 10 अक्तूबर से हो रहे किराया बढ़ोतरी को रोका जाए। इस बीच केंद्र और दिल्ली सरकार के डीएमआरसी बोर्ड के सदस्य बैठकर मेट्रो किराया संरचना की समीक्षा करें। हम पहले ही अपने सभी नामित बोर्ड सदस्यों की आपात बैठक बुलाने की बात कह चुके हैं।

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